सेंट्रल जेल से सोमवार सुबह भागे कैदी नरपाल उर्फ सोनू की गिरफ्तारी के साथ उसके पास तमंचे और कारतूसों की बरामदगी दिखाकर पुलिस खुद सवालों में घिर गई है। दरअसल खुद पुलिस का दावा है कि जेल से फरार होने के बाद नरपाल न कहीं रुका न किसी से मिला, ऐसे में सीधा सवाल उठ रहा है कि क्या वह सेंट्रल जेल से ही तमंचा और कारतूस लेकर गया था।
बिजनौर के किरतपुर थाने के गांव रायपुर मौजमपुर निवासी 36 वर्षीय नरपाल उर्फ सोनू दुष्कर्म और हत्या के मामले में 28 अप्रैल 2012 से सेंट्रल जेल में सजा काट रहा था। जेल का नंबरदार होने के नाते उसे सभी बैरकों में आने-जाने की छूट भी दी गई थी। इसी का फायदा उठाकर वह सोमवार को तड़के घने कोहरे में सरिया के सहारे जेल की दीवार फांदकर फरार हो गया।
किरतपुर पुलिस के हाथों गिरफ्तारी के बाद थाने के इंस्पेक्टर जीत सिंह ने बताया कि मंगलवार दोपहर साढ़े तीन बजे नरपाल मौजमपुर गांव में चौराहे के पास पकड़ा गया। वह घर नहीं पहुंच पाया था। उसके पास से एक तमंचा और दो कारतूस बरामद हुए। मगर सेंट्रल जेल से भागे कैदी पर तमंचा और कारतूस कहां से आया, इसका जवाब पुलिस के पास नहीं है।
इंस्पेक्टर जीत सिंह का कहना है कि पूछताछ में नरपाल ने बताया कि वह जेल की दीवार फांदने के बाद पैदल रामपुर पहुंच गया। रामपुर से एक बस में बैठकर बिजनौर आया जहां से फिर पैदल अपने गांव जा रहा था। गांव में घर से कुछ दूर चौराहे पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। यानी साफ है कि रास्ते में वह न कहीं रुका न किसी से मिला। अब सवाल उठने के बाद पुलिस भी साबित नहीं कर पा रही कि 24 घंटे के भीतर नरपाल के पास तमंचा व दो कारतूस कहां से आ गए।
70 किलोमीटर का पैदल सफर 24 घंटे में
इंस्पेक्टर किरतपुर जीत सिंह के मुताबिक सोमवार रात साढ़े तीन बजे सेंट्रल जेल से भागने के बाद नरपाल पैदल रामपुर पहुंचा। बरेली से रामपुर की दूरी करीब 70 किलोमीटर है। आदमी औसतन एक घंटे में पांच किमी चलता है, इस लिहाज से रामपुर पहुंचने में नरपाल को 14 घंटे लगे होंगे। रामपुर से बिजनौर करीब 120 किमी दूर है। पुलिस के मुताबिक नरपाल बस से कम से कम तीन घंटे में बिजनौर पहुंचा होगा।
बिजनौर से गांव रायपुर मौजमपुर की दूरी भी करीब 20 किमी है जहां तक फिर उसका पैदल चलना बताया जा रहा है। यानी इसमें उसे चार घंटे लगे होंगे। यानी वह 21 घंटे में अपने गांव पहुंचा और इस हिसाब से वह 90 किमी तक लगातार चलता रहा।