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बदायूं में पुलिस का खेल: शिब्ते रजा को पशु तस्कर साबित करने के लिए दिखाई फर्जी मुठभेड़, ऐसे हुआ खुलासा

Mon, 12 Jan 2026 10:44 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली/बदायूं

सार

बदायूं जिले के कुंवरगांव थाना प्रभारी ने गजब खेल किया। उन्होंने जिस शख्स को मुठभेड़ के दौरान फरार होना दिखाया, घटना के दिन उसकी लोकेशन बरेली में मिली। फर्जी मुठभेड़ का खुलासा तब हुआ जब आरोपी की मां ने डीआईजी को सबूत सौंपे। प्रारंभिक जांच में थाना प्रभारी कुंवरगांव की भूमिका संदिग्ध मिली है। 
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बुजुर्ग को घर से ले जाती बदायूं एसओजी। - फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
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बदायूं जिले के कुंवरगांव थाना प्रभारी राजेश कौशिक रस्सी का सांप बनाने में बुरी तरह फंस गए हैं। उन्होंने एक शख्स को पशु तस्कर साबित करने के लिए उससे फर्जी मुठभेड़ तक दिखा दी, जबकि वारदात के वक्त वह 62 किसी दूर बरेली में था। परिवार ने लोकेशन व फुटेज जैसे सबूत डीआईजी के सामने पेश किया है। गर्दन फंसती देख एसओ ने बदायूं एसओजी से निजी तौर पर मदद मांगी। इससे उन पर फंदा और कस गया है। 

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एसओ राजेश कौशिक ने एक नवंबर को कुंवरगांव थाने का प्रभार संभाला था। छह नवंबर की सुबह हुसैनपुर करौतिया के जंगल में प्रतिबंधित पशु के अवशेष मिले थे। तब पड़ोसी गांव निवासी किसान ने अपने पशु के चोरी होने और उसको काटे जाने का आरोप लगाते हुए अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एसओ ने सात नवंबर को तड़के ही पशु तस्करों से मुठभेड़ होने का मामला दर्ज किया। इसमें सरताज नाम के आरोपी को पकड़ने का दावा करते हुए शिब्ते रजा, बबलू व नवासे को मुठभेड़ के दौरान फरार दिखा दिया। इन आरोपियों की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश शुरू कर दी।

एसओजी ने बुजुर्ग पड़ोसी को उठाया, फुटेज वायरल 
डीआईजी को प्रारंभिक जांच में एसओ कुंवरगांव की भूमिका संदिग्ध मिली तो उन्होंने एसओ को मुख्यालय बुलाकर विस्तृत जांच तक दबिश न देने की चेतावनी दी। आरोपी को जेल भेजकर खुद को पाकसाफ दिखाने की कोशिश में एसओ ने निजी संबंधों का इस्तेमाल किया और बदायूं एसओजी से मदद मांगी। एसओजी ने आरिफपुर में दबिश दी तो आरोपी पक्ष घर पर नहीं मिला। तब एसओजी दबाव बनाने के लिए पड़ोसी 70 वर्षीय फरीद को बदायूं कोतवाली उठा ले गई। पीड़ित परिवार ने डीआईजी व एसएसपी बदायूं से शिकायत की तो बुजुर्ग को छोड़ा गया। एसओजी का बुजुर्ग को ले जाते हुए सीसी फुटेज वायरल हो गया।

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मां ने डीआईजी को दिए सबूत, प्रधानी चुनाव की रंजिश बताई
बदायूं के आरिफपुर नवादा निवासी हबीबा बेगम कुछ दिन पहले डीआईजी से मिलीं। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से कुंवरगांव के हुसैनपुर करौतिया गांव की निवासी हैं। उनका बेटा शिब्ते रजा प्रधानी चुनाव लड़ना चाहता था। तीन साल पहले अज्ञात में पशु तस्करी का मुकदमा दर्ज करके उनके बेटे को आरोपी बना दिया गया। इसके बाद उन लोगों ने गांव ही छोड़ दिया और बदायूं में घर बनाकर रहने लगे।

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उनका बेटा काम के सिलसिले में कभी बदायूं तो कभी बरेली में रहता है। अब उन्हें पता लगा कि उन्हीं के समाज के विरोधियों ने बेटे का नाम फिर केस में लिखवा दिया है। उन्होंने साक्ष्य पेश किए। बताया कि जिस दिन की घटना दिखाई जा रही है, उनका बेटा उस दिन बरेली में था। पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस कर ले। बेटे की बरेली में मौजूदगी के कई फुटेज उनके पास हैं।  
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दबिश जैसी कार्रवाई पर रोक 
बदायूं के एसएसपी डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि गलत तरीके से किसी को पशु तस्करी जैसे गंभीर मामले में आरोपी बनाने के मामले में बदायूं पुलिस खुद भी जांच कर रही है। रेंज कार्यालय से मिले निर्देश के बाद थाना स्तर से दबिश जैसी कार्रवाई रोक दी गई है। एसओजी को जानकारी नहीं रही होगी, इसलिए ऐसा हुआ होगा। 

डीआईजी अजय कुमार साहनी ने बताया कि प्रतिबंधितत पशुओं की तस्करी रोकने के लिए पुलिस प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी को फर्जी तरीके से फंसाया तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। चेतावनी के बाद भी दबिश क्यों दी गई, इस बारे में एसओजी व संबंधित अधिकारियों का स्पष्टीकरण लिया जाएगा। 

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