कोरोना संक्रमण की दहशत में डूबे लोगों की आसपास इलाकों में बाहर से आए लोगों पर पैनी नजर है। शनिवार को श्यामगंज पुल के नीचे हबीबी दरगाह में बाहर से कुछ जमातियों के आने का शोर मच गया।
शनिवार देर शाम कुछ लोगों ने बारादरी पुलिस और आला अधिकारियों को श्यामगंज चौराहे से विकास भवन की ओर जाने वाले रोड पर बनी हबीब शाह की दरगाह और मस्जिद में बाहर से 15-20 जमातियों के आकर ठहरने की सूचना दी। इन लोगों का कहना था कि बस्ती वालों की नजर से बचने के लिए ये जमाती अलग-अलग दरगाह से बाहर टहलने निकलते हैं।
इमाम बोले- कोई बाहरी नहीं आया यहां दरगाह के इमाम मोहम्मद अलीम अंदर थे। सेमलखेड़ा के फरमान अपनी पत्नी इरम और बेटे के साथ यहां किराये पर रहते हैं। जिस वक्त पुलिस पहुंची, वह मेडिकल स्टोर गए हुए थे। इसके अलावा दरगाह में कालीबाड़ी का कफील भी मिला जिसने पुलिस को बताया कि उसके पिता लईक दरगाह के मुतवल्ली हैं और इसी कारण वह यहां आता रहता है। पुलिस ने दरगाह मं मिले इन सभी के नाम-पते और मोबाइल नंबर नोट किए। इमाम ने कहा कि वे लोग बरेलवी हैं और जमातियों से उनका कोई वास्ता नहीं है। दरगाह में बाहरी लोगों के ठहरने की सूचना मिल रही थी। हालांकि मौके पर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। फिर भी एहतियात के तौर पर पूरी जांच पड़ताल की जाएगी। कोई नई जानकारी मिली तो कार्रवाई करेंगे। - नरेश त्यागी, इंस्पेक्टर बारादरी
मगर एएसपी के निर्देश पर देर रात बारादरी पुलिस ने छापा मारा तो यहां इमाम समेत चार लोग ही मिले। हालांकि शक के आधार पर पुलिस ने सभी के नाम पते नोट कर छानबीन शुरू कर दी है।
पीछे एक कब्रिस्तान भी है। यह भी कहा गया कि गंगापुर में रहने वाले तीन युवक दरगाह में ठहरे इन जमातियों के लिए खानपान का बंदोबस्त कर रहे हैं। किसी को इन अजनबियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
इस सूचना पर एएसपी अभिषेक वर्मा ने बारादरी इंस्पेक्टर नरेश त्यागी को जांच का निर्देश दिया तो वह देर रात भारीभरकम फोर्स के साथ दरगाह के गेट पर पहुंचे। गेट खुलवाने की कोशिश की तो करीब 15 मिनट का वक्त लग गया। पुलिस ने अंदर जाकर देखा तो पता लगा कि बाहर निकलने के लिए दो और दरवाजे हैं। हालांकि काफी छानबीन के बाद भी दरगाह में ज्यादा लोगों की मौजूदगी का संकेत नहीं मिला। करीब आधे घंटा बाद पुलिस लौट आई।