हाईकोर्ट तक व्यापारियों के साथ रही पुलिस
प्रीतम सिंह ने बताया कि उनके मुकदमे में जानलेवा हमले की धारा 109 पहले से दर्ज थी। शुरू में विवेचक ने निष्पक्षता से काम किया। आरोपियों ने जब हाईकोर्ट से स्टे लेने के लिए प्रार्थना पत्र दिया तो विवेचक ने कोर्ट को जानकारी दी कि मुकदमे में धारा 111 (2) व 118 की बढ़ोतरी की जा चुकी है। जिला जज के यहां जब आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी तो पुलिस ने वहां भी यही तर्क प्रस्तुत किए।
एक ही विवेचक-एक ही थानेदार...सेटिंग के बाद खेल की चर्चा
प्रीतम ने बताया कि जब पुलिस ने तीन दिन पहले मयंक वर्मा समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर बहेड़ी कोर्ट में पेश किया तो धारा 109 के साथ ही 117 (2) का जिक्र नहीं किया। प्रीतम का आरोप है कि जब दुकानदारों पर हमला व दुकान में आग लगाने की घटनाएं दिनदहाड़े की हैं, तमाम लोग इसके गवाह हैं तो पुलिस ने केवल सेटिंग के आधार पर ही ये खेल किया है। पूरी विवेचना के दौरान जब एक ही थाना प्रभारी व एक ही विवेचक हैं और हाईकोर्ट तक वह जिन धाराओं को लगाने का जिक्र कर चुके हैं, तब धाराएं हटाने का कोई आधार नहीं है।
सपा नेता से जुड़े हैं दबंग, व्यापारी ने जताया खतरा
प्रीतम ने देवरनिया थाना पुलिस पर भरोसा न होने की बात कहते हुए एसएसपी से विवेचना किसी और थाने से कराने या फिर देवरनिया पुलिस को पूर्व में लगी धाराओं को बहाल करके आरोपियों का चालान कोर्ट में प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित करने की मांग की है। विवेचक व थाना प्रभारी की भूमिका की जांच कराने की भी मांग की है। प्रीतम ने यह भी डर जताया है कि आरोपी शशांक वर्मा व मयंक वर्मा सपा के एक जनप्रतिनिधि से जुड़े हैं और काफी दबंग प्रवृत्ति के हैं। इनके स्वर्गवासी दादा कई साल पहले बहेड़ी से विधायक रहे हैं। इस वजह से आरोपियों का राजनीति व पुलिस प्रशासन में काफी दखल है। उसे व उसके परिवार को जान का खतरा भी हो सकता है।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि देवरनिया थाना पुलिस पर विवेचना में खेल करने का आरोप लगाया गया है। मामले की जांच कराई जाएगी। किसी व्यापारी या नागरिक को किसी से डरने की जरूरत नहीं है।