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सराफ लूटकांड में ड्राइवर ने कराई लूट, पूर्व चेयरमैन का बेटा भी था शामिल

Mon, 18 Mar 2019 12:46 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
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सवा दो महीने पहले सराफ के कर्मचारियों से पंद्रह लाख लूटने और दो बदमाशों के मारे जाने के मामले में एसएसपी ने रविवार को नया खुलासा किया। सात बदमाशों की गिरफ्तारी दिखाकर बताया कि सराफ के भाई का ड्राइवर लूट का सूत्रधार था। उसने साथियों की मदद से बाहरी बदमाशों से संपर्क किया। छह महीने रेकी की गई। धौराटांडा के पूर्व चेयरमैन अब्दुल अजीज का बेटा फैसल भी इसमें शामिल था। सर्विलांस की मदद से इन्हें गिरफ्तार किया गया।
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एसएसपी मुनिराज जी. ने बताया कि सात जनवरी को हुई घटना सुनियोजित थी। पीड़ित सराफ अनूप अग्रवाल के भाई मनोज का ड्राइवर अमित निवासी चौपुला वारदात का मास्टरमाइंड था। कार में सराफ बात करते थे तो उसे पता रहता था कि कितना कैश कब और कहां भेजेंगे। छह महीने पहले उसने ड्राइवर दोस्त बानखाना निवासी संतोष और अतुल से बात की। कहा कि दस-बारह हजार की नौकरी में गुजारा नहीं होता, हमें बड़ा काम करना चाहिए। 

अतुल ने अपने साथी देवरनिया के बसुधरन गांव निवासी सुरेंद्र उर्फ राजू और शेरगढ़ बंजरिया जागीर के तनवीर से संपर्क किया। इनकी दोस्ती धौराटांडा के पूर्व चेयरमैन सपा नेता अब्दुल अजीज के बेटे फैसल से थी। फैसल ने धौरा के ही वकील अहमद को साथ लिया। वकील और तनवीर मुठभेड़ में मारे गए बदमाश गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी अशोक के साथ पहले भी घटनाएं कर चुके थे। इन्होंने अशोक को अपने गैंग के साथ घटना करने बुलाया। 
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दो महीने पहले अशोक और कपिल को बुलाकर अमित ने रेकी कराई दी कि किस तरह ऑटो में रुपये लाए जाते हैं। छह जनवरी की शाम ही अशोक और कपिल अपने तीन अन्य साथियों को लेकर बरेली आ गए। सब सेटेलाइट बस स्टैंड पर मिले। रात में राजू ने इन्हें दोस्त बताकर अपने बहनोई के घर रुकवाया। सुबह चार बजे से ही इन्होंने अलग-अलग टीमें बनाकर अनूप अग्रवाल के घर के बाहर मोर्चा संभाल लिया। कुछ बाइक से थे तो फैसल अपनी टाटा सफारी से पीछे था। बताया कि अमित के इशारे पर अशोक और उसके साथियों ने सराफ के कर्मचारी को गोली मारकर 15 लाख रुपये लूट लिए। 

बाकी पीछे रह गए और अशोक व उसका गैंग बाइकों से आगे निकल गया। लूट के बाद इज्जतनगर ओवरब्रिज के नीचे मिलकर रकम बांटने का प्लान था, लेकिन अशोक और कपिल मुठभेड़ में मारे गए। तब से अधिकांश फरार थे। इनमें किसी को धेला भी नहीं मिला। मृत बदमाशों के मोबाइल की डिटेल से नंबरों को सर्विलांस पर लगाकर तहकीकात की गई तो सारा खेल सामने आ गया। खुलासे के वक्त एसपी सिटी अभिनंदन सिंह, एसपी क्राइम रमेश भारतीय भी थे। 
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चावल भरा ट्रक लूटा था पूर्व चेयरमैन के बेटे ने

घटनाक्रम अब पूरी तरह साफ है। मृत कपिल पुराना नामी बदमाश था तो उसका साथी अशोक भी दिल्ली में गैंग चलाता था। ये अलग बात है कि अधिकांश घटनाओं में वो खुद नहीं जाता था, जिससे उसका नाम नहीं खुला था। उसके तीन और साथियों के नाम-पते की जानकारी इन बदमाशों को भी नहीं है। उन्हें तलाश किया जाएगा। सुभाषनगर पुलिस के साथ क्राइमब्रांच ने केस खोला है। टीम को 20 हजार का ईनाम दिया जाएगा।- मुनिराज जी. एसएसपी
 
धौराटांडा नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन अब्दुल अजीज सपा के भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इनके बेटे फैसल का नाम कई वारदातों में आया था पर पहली रिपोर्ट आठ नवंबर 2011 को चावल भरा ट्रक लूटने की हुई। हरियाणा का ट्रक रिछा की राइस मिल से 120 क्विंटल कनकी लेकर चला था। फैसल ने अपने चार साथियों के साथ ड्राइवर सोनू को बांधकर ट्रक लूटा था। 

ट्रक में लगी चिप के से प्रहलादपुर से ट्रक मिला। इसमें फैसल जेल गया और कुछ दिन पहले ही छूटा था। खतौला के रेहान रजा का ट्रक भी फैसल ने बहाने से लेकर बिहार में बेच दिया। रेहान ने एसएसपी से शिकायत की, कार्रवाई के आदेश के बाद भी भोजीपुरा पुलिस ने न तो रिपोर्ट लिखी न ट्रक खोजा। चर्चा है कि धौराटांडा पुलिस इस परिवार पर मेहरबान रहती है, जिसकी वजह से मामले दर्ज ही नहीं किए जाते।  

चेहरों पर नकाब थे, जुबान पर ताला
पुलिस ने सातों आरोपियों को 16 मार्च की रात सिठौरा बिजली उपकेंद्र से गिरफ्तार करने का दावा किया। पुलिस की बताई कहानी के मुताबिक सातों घटना के बारे में बातचीत करने के लिए यहां आए थे। इनके पास से लूट में शामिल फैसल की टाटा सफारी, यामहा फेजर बाइक, आठ मोबाइल, तीन तमंचे व कुछ कारतूस बरामद किए गए। प्रेसवार्ता में भी सारे बदमाशों के चेहरों पर नकाब थे। पत्रकारों ने इनसे बात करने की कोशिश की पर इनमें से कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ। केवल अधिकारियों ने ही गुडवर्क का दावा किया।

कागज दिए नहीं, बयान को दबाव बना रही पुलिस
खुलासे के बारे में संभल के असमोली क्षेत्र निवासी कपिल के भाई सुरेंद्र और अशोक के पिता छोटेलाल का कहना है कि वे तो अरसे से कॉलडिटेल निकलवाकर सच सामने लाने को कह रहे थे। वे भी जानकारी करेंगे कि खुलासा कितना सही है। सुरेंद्र ने बताया कि पंचनामा, पोस्टमार्टम व अन्य कागजात न मिलने की वजह से मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं बन सका है और संपत्ति, गन्ना भुगतान व बैंक खाते में मौजूद धन का हस्तांतरण समेत कई काम रुके हैं। बताया कि मजिस्ट्रेट जांच से लेकर पुलिस जांच तक में उनके बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस उनके पीछे पड़ी है। शनिवार को बस भरकर करीब 40 पुलिसवाले उनके घर आए। उन्होंने साफ कह दिया कि उन्हें कागजात दिए जाएं, इसके बाद ही वे बयान दर्ज कराएंगे।
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