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गहन मंथन के बाद लिया कश्मीर के बंदियों को जिला जेल में रखने का फैसला

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बरेली। शहर से करीब 15 किमी दूर जिला जेल में कश्मीर के बंदियों को रखने का निर्णय यूं ही नहीं लिया गया। शहर में बनी सेंट्रल जेल के मुकाबले जिला जेल में सुरक्षा के अत्याधुनिक बंदोबस्त है। इसी वजह से सेंट्रल जेल के बजाय जिला जेल का चुना गया।
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कश्मीर से लाए गए बंदियों को बरेली भेजे जाने से पहले ही इस बारे में ऊपर से निर्देश जारी कर दिए गए थे। अफसरों ने पहले इन बंदियों को सेंट्रल जेल में रखने का प्लान बनाया। माना गया कि सेंट्रल जेल शहर के ही एक छोर पर है और वहां सुरक्षा के ज्यादा बंदोबस्त हैं। किसी भी आपात स्थिति में पूरे शहर का फोर्स मिनटों में वहां पहुंच सकता है। मगर कुछ अफसरों ने तर्क दिया कि शहर से दूर स्थित नई जिला जेल में सेंट्रल जेल के मुकाबले कई गुना बेहतर सुरक्षा प्रबंध हैं। नई जिला जेल में करीब 4800 बंदियों को रखा जा सकता है जबकि अभी करीब ढाई हजार बंदी ही वहां हैं। ऐसे में असुरक्षा जैसी कोई दिक्कत वहां नहीं आएगी। सेंट्रल जेल बरसों पुरानी है। उसकी तुलना में जिला जेल के सुरक्षा मानक, उपकरण, जैमर आदि भी कहीं ज्यादा अपडेट हैं। आसपास सुरक्षा घेरा बढ़ाकर वहां बंदियों को आराम से यहां रखा जा सकता है। इन तर्कों के आधार पर बंदियों को जिला जेल में रखने का फैसला लिया गया। थाना बिथरी को अतिरिक्त फोर्स देकर आसपास सुरक्षा और घनी कर दी गई है।

जिला और सेंट्रल जेल को मिलेंगे सौ सिपाही
हाल ही में बंदियों के जेल से भागने की घटनाओं में बढ़ोत्तरी के बाद सीएम योगी ने संवेदनशील क्षेत्रों की जेलों के सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की। डीजी जेल आनंद कुमार ने उनके सामने बताया कि कई जेलों में स्टाफ की भारी कमी है। सीएम के निर्देश पर बरेली सेंट्रल और जिला जेल के लिए 50-50 सिपाहियों को अतिरिक्त से लगाने की व्यवस्था की गई है। जल्दी ही ये सिपाही इन जेलों को मिल जाएंगे और सुरक्षा घेरा ज्यादा मजबूत हो जाएगी। सेंट्रल जेल के अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने बताया कि अतिरिक्त स्टाफ भेजने के फैसले की जानकारी उन्हें है पर अभी तक स्टाफ आया नहीं है।
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