बरेली। साढ़े छह करोड़ के टेंडर एक नेताजी के खास गुर्गों को देने के साथ ऐसे ही कई विवादों में घिरे पीओ डूडा विनय कुमार का शासन ने तबादला कर दिया है। सपा शासन में बरेली में तैनाती पाने वाले विनय कुमार भाजपा सरकार में भी एक नेताजी को साधकर यहीं जमे रहे। साढ़े छह करोड़ के टेंडर नेताजी के चहेतों को देने पर भाजपा विधायक से पीओ का जोरदार टकराव हुआ था। पीएम आवास के बदले लाभार्थियों से घूस लेने की भी कई शिकायतें उनके खिलाफ शासन में पहुंची थीं। विनय कुमार को संभल भेजा गया है जबकि भदोही में इसी पद पर कार्यरत शैलेंद्र भूषण सिंह को उनकी जगह बरेली में तैनात किया गया है।
नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के परियोजना अधिकारी के तौर पर विनय कुमार सिंह की तैनाती सपा सरकार में वर्ष 2016 में हुई थी। तब उनको तत्कालीन पीओ एसी तिवारी को हटाकर चार्ज दिया गया था। विनय कुमार ने सपा सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘आसरा’ योजना को पूरा नहीं किया। खड़ौआ में इस योजना में बने 216 से अधिक मकानों का आज तक लाभार्थियों को आवंटन नहीं हो सका। वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद विनय कुमार के ट्रांसफर की चर्चा चली तो उन्होंने भाजपा के एक बड़े नेता को साथ लिया। डूडा में एक साल पहले उन नेताजी के रिश्तेदारों की फर्मों को ही 6.5 करोड़ के टेंडर देने के मामले पर पीओ से भाजपा के ही एक तेज तर्रार विधायक ने आपत्ति की।
पीओ डूडा फिर भी नेताजी के रिश्तेदारों को टेंडर देने पर अड़े रहे तो विधायक अपने समर्थकों के साथ पीओ के दफ्तर में पहुुंच गए। वहां विधायक ने पीओ को दफ्तर के कमरे बंद करके टेंडर के बारे में बहुत देर तक कुछ समझाया। हालांकि इस दौरान विधायक समर्थकों द्वारा पीओ के साथ मारपीट की भी चर्चा रही, लेकिन पीओ ने न तो मारपीट होना स्वीकार किया और न ही विधायक के खिलाफ कोई तहरीर ही दी, बल्कि लंबे अवकाश पर चले गए। अफसरों ने भी इस संबंध में पीओ से बहुत कुछ पूछा, लेकिन परियोजना अधिकारी मारपीट की बात को सिरे से ही नकार गए और अपना कामकाज संभाल लिया। तत्कालीन नगर आयुक्त ने टेंडर निरस्त करने की संस्तुति कर दी और जिलाधिकारी ने विवादित टेंडर निरस्त कर दिए।
पीएम आवास के लिए घूस मांगने पर हुई एफआईआर
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना में डूडा कर्मचारियों द्वारा पात्रता में नाम शामिल करने के बदले दो से तीन हजार रुपये मांगने की शिकायतें भी हुई थीं। फरीदपुर में एक महिला की पीएम आवास में रुपये मांगने के आरोप पर कमिश्नर ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दे दिए। हालांकि बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। शेरगढ़ और मीरगंज के अलावा नवाबगंज, भोजीपुरा और आंवला के पीएम आवास के आवेदकों ने पात्रता सूची में शामिल करने के बदले रुपये मांगने के आरोप लगाए। फिर भी पीओ डटे रहे। अब उनका ट्रांसफर संभल कर दिया गया।