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एक मठिया की आड़ में कब्जों की भरमार, अब दूसरी मठिया तैयार

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बनाई गई मठिया। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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मॉडल टाउन चौकी से स्टेडियम के बीच नगर निगम की जमीन पर पहले मठिया बनी फिर हुए बाकी अवैध निर्माण
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हाल ही में डीडीपुरम गेट पर बनी दूसरी मठिया की आड़ में भी हो रहे हैं कब्जे

बरेली। स्टेडियम रोड पर मॉडल टाउन चौकी से लेकर स्पोर्ट्स स्टेडियम तक नगर निगम की करोड़ों की जमीन पर कब्जे करने की कहानी दिलचस्प है। इस जमीन पर सबसे पहला कब्जा एक मठिया के रूप में हुआ और फिर उसी की सीध में पूरी सड़क पर कब्जे हो गए। इसी तरह का एक कब्जा अब डीडीपुरम गेट पर हुआ है। यहां सड़क की पटरी पर बनाई गई मठिया की आड़ में भी नए कब्जे शुरू हो गए हैं।
सड़क किनारे जिस हिस्से में अवैध कब्जे हुए हैं, वह भारत-पाक विभाजन के बाद विस्थापितों के लिए बसाई गई मॉडल टाउन कॉलोनी के बाहर का है। मॉडल टाउन पुलिस चौकी से स्पोर्ट्स स्टेडियम की दीवार तक सन् 1952 में दस फुट चौड़े नाले का निर्माण कराया गया था। इस दौरान कॉलोनी की चहारदीवारी और नाले के बीच दस फु ट चौड़ी जमीन को इसलिए खाली छोड़ दिया गया था ताकि कभी जरूरत पड़ने पर नाले को और चौड़ा किया जा सके लेकिन खाली छोड़ी गई इस जमीन को मानचित्र में नहीं दर्शाया गया।
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समय के साथ बरेली नगर पालिका पहले महापालिका और फिर नगर निगम में बदली। अधिकारी भी बदलते रहे और उन्हें मानचित्र में चिन्हित न होने के कारण जमीन के बारे में कुछ पता भी नहीं चल पाया। इलाके के पुराने लोग बताते हैं कि काफी साल पहले इस जमीन पर सबसे पहले एक मठिया का निर्माण हुआ। इसके बाद उसी की आड़ में दूसरे कब्जे शुरू हो गए और फिर नाले के बराबर का यह पूरा हिस्सा अवैध कब्जों का शिकार हो गया।
बता दें कि हाल ही में इसी तरह की एक और मठिया डीडीपुरम गेट के पास सड़क की पटरी पर बना ली गई है। तमाम शिकायतों के बावजूद न नगर निगम इस मठिया के खिलाफ कार्रवाई करने को तैयार है न ही पुलिस। अब इस मठिया की आड़ में भी अवैध कब्जे शुरू हो गए हैं।

शासन के आदेश के बाद भी सड़क पर बने धर्मस्थलों पर नहीं शुरू हो पा रही कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कई साल पहले सभी राज्यों में 2011 के बाद सड़कों पर बने धर्मस्थलों को हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को अवैध धर्मस्थलों को हटाने का आदेश दिया। हाल ही में इस आदेश का पालन न होने पर नाराजगी भी जताई जिसके बाद अब शासन ने अवैध धर्मस्थलों को हटाने को कहा है। कुछ और जिलों में इस आदेश पर क्रियान्वयन शुरू हो गया है लेकिन बरेली में इस बार भी इस आदेश पर अब तक खामोशी का माहौल है। पिछले दिनों अफसरों ने अवैध धर्मस्थलों को चिन्हित करने का दावा जरूर किया था लेकिन कार्रवाई अब तक शुरू नहीं हुई है।

बीडीए उपाध्यक्ष बोले- जानकारी जुटा रहा हूं, कार्रवाई भी होगी

बीडीए उपाध्यक्ष जोगिंदर सिंह ने कहा कि उन्हें अभी इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। वैसे अब यह सड़क स्मार्ट सिटी के दायरे में भी हैं और हाल ही में इसे चौड़ा करने के साथ इसका सौंदर्यीकरण करने का प्रस्ताव भी पारित हो चुका है। बजट का भी इंतजाम हो चुका है लिहाजा इस सड़क पर जल्द ही काम शुरू होना है। उन्होंने कहा कि नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जों के संबंध में वह जानकारी जुटा रहे हैं। यह देखा जाएगा कि दस्तावेजों में क्या स्थिति है। इसके साथ वह इस बारे में नगर आयुक्त से भी बात करेंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मस्जिद को देते हैं किराया

मैं यहां पंद्रह साल से हूं। मैं नाले से पीछे हूं और अपनी टाल का किराया भी मस्जिद को हर महीने देता हूं। हमने यहां कोई कब्जा नहीं किया है। नाले के आगे कब्जा माना जाएगा। जब हम नाले के आगे गए ही नहीं तो कब्जा कैसे हो गया। -हाजी मुन्ने, लकड़ी वाले, ईंट पजाया चौराहा

मठिया की सीध में थे, अब आगे

मेरी दुकान तो मठिया के पीछे है। मैं यहां करीब तीस सालों से हूं। पहले यहां सभी दुकानें, अस्पताल और शोरूम इसी मठिया के पीछे से सीधे लाइन में थे लेकिन अब तो लोगों ने आगे तक बना लिए हैं। पहले इतने आगे नहीं बने थे। इसी मठिया की सीध में सब पीछे की ओर तक थे। -पंकज अरोड़ा, पान दुकानदार मॉडल कॉलोनी गेट
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तौर पर कब्जेदारों ने कब्जा कर लिया है। दरअसल वह जमीन पटरी के रूप में मानचित्र में दर्ज नहीं है। यही कारण है कि लोगों ने नाला निर्माण के बाद करोड़ों की सरकारी जमीन हड़प ली है। नगर निगम का कहना है कि वह इस मामले में दस्तावेजों की जांच कराएगा और इसके बाद आगे की कार्रवाई को आगे बढ़ाएगा।
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