बरेली। प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को मिलने वाले प्रमाणपत्र का बड़ा महत्व है। इसके आधार पर ही विभिन्न विभागों में भर्ती की जाती है, लेकिन कई लोग अपने फायदे के लिए इसमें फर्जीवाड़ा कर देते हैं। कई बार एसोसिएशन से संबद्धता के बिना ही प्रतियोगिता कराई जाती है और खिलाड़ी को विजेता बनने का भी कोई लाभ नहीं होता। इसी धांधली को रोकने के लिए खिलाड़ियों का डाटा ऑनलाइन किया जा रहा है। खिलाड़ियों को मिलने वाले प्रमाणपत्रों पर सेफ्टी कोड लगाया जाएगा। इसको स्कैन करने से खिलाड़ी की समस्त जानकारी पर उपलब्ध हो जाएगी।
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से खेलों में फर्जीवाड़े की रोकथाम के लिए यह पहल शुरू हुई है। इससे खेल कोटे से भर्ती व नौकरी के लिए अलग-अलग संस्थानों को जिला एथलेटिक्स संघ की मुहर की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऑनलाइन ही प्रमाणपत्रों का सत्यापन हो जाएगा। जिला, प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में मिलने वाले प्रमाणपत्रों में खिलाड़ियों का फोटो वाला सेफ्टी कोड लगाया जाएगा। कोड को स्कैन करते ही प्रतिभागी की सभी जानकारी मिल जाएगी।
साई सेंटर के एथलेटिक्स के कोच जेएस द्विवेदी ने बताया कि सेफ्टी कोड की प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर के खेलों में लागू हो चुकी है। मंडलीय व जिला स्तर पर व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है। इस सत्र या अगले सत्र में होने वाली प्रतियोगिताओं में इसकी झलक देखने को मिल सकती है।
ईमेल पर होगी डोपिंग जांच की जानकारी
प्रतियोगिता के प्रमाणपत्र मिलने पर खिलाड़ियों का डोप टेस्ट कराया जाता है। पहले इसके लिए खिलाड़ियों को जिला एथलेटिक्स संघ से प्रमाणपत्र लाना होता था। अब डोप टेस्ट के बाद खिलाड़ियों को प्रमाणपत्र मेल किए जाएंगे। इससे खिलाड़ियों का समय बचेगा और उन्हें कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पहले भी कई बार सामने आया है फर्जीवाड़ा
अंतर महाविद्यालयीय व विश्वविद्यालयीय खेलों में पहले भी कई खिलाड़ियों के दस्तावेज में उम्र, पता, कॉलेज का नाम आदि में फर्जीवाड़े का मामला सामने आ चुका है। इसी को खत्म करने के लिए डिजिटल प्रमाणपत्र दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है।