68 ट्रेड चिन्हित कर 17 विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारी, शहरी आजीविका केंद्र बना
बरेली। मजबूरी के हालात में तमाम शहरों से अपने गांव लौटे प्रवासियों को रोजगार के लिए फिर दर-बदर न होना पड़े, सरकारी स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। शासन के निर्देश पर अफसरों ने कागजों पर यह तैयारी शुरू करते हुए जिले में ऐसे दस हजार प्रवासियों को काम दिलाने का लक्ष्य तय किया है। रोजगार दिलाने का मकसद पूरा करने की जिम्मेदारी 17 विभागों को सौंपी गई है और इसके लिए 68 ट्रेड चिन्हित कर शहरी आजीविका केंद्र भी बना दिया है।
प्रशासन की ओर से रोजगार दिलाने के लिए चिह्नित किए गए प्रवासियों से फोन पर संपर्क कर उनकी योग्यता, अनुभव और ट्रेड की जानकारी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पिछले दिनों डीएम नीतीश कुमार 18 सदस्यीय शहरी आजीविका केंद्र भी बना चुके हैं जिसके अध्यक्ष वह खुद होंगे। इस केंद्र के जरिये जिले भर में अब तक 10,615 कुशल और अकुशल प्रवासी श्रमिक चिह्नित किए हैं। अफसरों के मुताबिक जो प्रवासी श्रमिक चिन्हित होने से रह गए हैं, वे अपना ब्योरा श्रम या उद्योग विभाग में उपलब्ध करा सकते हैं। इसके लिए एक व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया गया है।
अफसरों का दावा है कि शासन की मंशा के मुताबिक प्रवासियों को जिले में ही रोजगार दिलाने के लिए 68 ट्रेड तय किए गए हैं। अकुशल श्रमिकों को मनरेगा में काम दिलाया जा रहा है। मंडल भर में 40 हजार से ज्यादा मजदूर मनरेगा में लग चुके हैं। स्वरोजगार पर भी जोर दिया जा रहा है। नव गठित रोजगार सृजन समिति स्व रोजगार करने वालों को बैंक से लोन दिलाने में भी मदद करेगी।
कमिश्नर ने ली रोजगार सृजन समिति की बैठक
प्रशासन ने प्रवासियों को रोजगार दिलाने के लिए छह महीने की कार्ययोजना बनाई है। पिछले दिनों विकास भवन में इस समिति की बैठक भी हो चुकी है। सोमवार सुबह कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने रोजगार सृजन समिति की बैठक में तैयारियों की समीक्षा की और प्रवासियों का प्राथमिकता से समायोजन कराने को कहा। बैठक में बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल, संयुक्त आयुक्त उद्योग आरआर गोयल, उप श्रमायुक्त अनुपमा गौतम समेत कई विभागों के अफसर शामिल हुए।
बरेली मंडल में चिह्नित प्रवासी
बरेली 10,615
बदायूं 18,733
पीलीभीत 15,589
शाहजहांपुर 18,895