बरेली। पितृपक्ष की शुरुआत रविवार से होगी। मान्यताओं के मुताबिक, इसमें तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को तृप्ति और मुक्ति मिलती है। श्राद्ध करने से पितर अति प्रसन्न होते हैं। परिवार में सुख, शांति, समृद्धि सहित वंशवृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
ज्योतिष पंडित मुकेश मिश्रा ने बताया कि भाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन मास की अमावस्या तक पितृपक्ष होता है। इस बार सप्तमी तिथि के क्षय की वजह से यह 15 दिन का होगा। इस बार इसकी शुरुआत पूर्णिमा को सुकर्मा योग में होगी। इस योग में किए गए कार्य सफल होते हैं। उनमें कोई बाधा नहीं आती है। वहीं, पितृ पक्ष का समापन अमावस्या को शुभ योग में होगा। इस योग में पूजा-पाठ करने वाले व्यक्ति भाग्यशाली, बुद्धिमान और गुणवान होते हैं। संवाद
ये वस्तुएं करें दान
पितृ पक्ष में घी, चांदी, रुपया, फल, नमक, तिल, स्वर्ण, वस्त्र एवं गुड़ का दान करें। जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए पितरों से क्षमा मांगें। पूजा करते समय पितरों की तस्वीर सामने रखकर उन्हें सफेद चंदन का तिलक लगाएं। चंदन की माला पहनाएं। इलायची, केसर, शक्कर, शहद से बनी खीर अर्पित करें। गाय के गोबर के उपले में अग्नि प्रज्वलित करें। पितरों के निमित तीन पिंड बनाकर आहुति दें। इसके बाद कौआ, गाय और कुत्तों को भी प्रसाद खिलाएं।