बेटे को बाघ ने मार दिया साहब... बहू कर रही मजदूरी
शहर से 20 किलोमीटर दूर बंगाली समाज की माला कॉलोनी में दोपहर में सन्नाटा पसरा था। एक घर में घुसे। पूछा कि घर में कोई आदमी है क्या, या सब काम पर गए हैं? जवाब देने से पहले बूढ़ी अम्मा की आंखों से आंसू छलक आए। बोलीं-अब कोई मर्द नहीं इस घर में। 70 साल की मंजू विश्वास ने बताया कि सामने जिस तस्वीर पर हार टंगा है, वह हमारे पति की है। अंदर दीवार पर टंगी तस्वीर बेटे की है।
पति की बीमारी से मौत हो गई। बेटे रघुनाथ को छह महीने पहले बाघ ने मार डाला। घर में उसकी पत्नी लक्ष्मी, पांच साल की बेटी माही व चार साल का बेटा राज है। खेती है नहीं सो बहू मजदूरी करने गई है। बताती हैं कि 20 साल से यहां रह रहे हैं। नेता बस वोट मांगने आते हैं। इसके बाद कोई नहीं आता। बेटा मर गया, लेकिन कोई हाल पूछने तक नहीं आया।
सबसे ज्यादा घटनाएं कलीनगर तहसील क्षेत्र में
जमुनिया के सियाराम ने बताया कि बेटे गंगाराम को 30 जून को बाघ ने मार दिया। आज तक कोई नेता झांकने तक नहीं आया। बाघ के हमले की घटनाएं अब रोजमर्रा की बात है। रानी कॉलोनी की गीता विश्वास ने कहा कि बाघों के हमलों में हमने अपनों को खोया है पर अब बहुत हो चुका। अब इस तरह काम नहीं चलेगा। जो प्रत्याशी हमारी समस्याओं के लिए खड़ा होगा, उसे ही हम वोट देंगे।
अधिकारियों पर लगते रहे भ्रष्टाचार के आरोप
बाघ के हमलों से ग्रामीणों को बचाने के लिए जाल फेंसिंग कराई जानी थी। इसके लिए टेंडर हुए पर इसमें पूर्व डिप्टी डायरेक्टर पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लग गए। दुधवा व पीटीआर का ठेका एक ही ठेकेदार को दे दिया गया। इस कारण दूसरा ठेकेदार हाईकोर्ट चला गया।