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कोर्ट की अवमानना में घिरे पीलीभीत डीएम: किशोर न्याय बोर्ड में गवाही के बीच जज से बोले थे- आप मुझे जानती नहीं

Thu, 23 Feb 2023 08:19 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

जज का कहना है कि डीएम, जिला प्रोबेशन अधिकारी और सभी स्टाफ ने न्यायालय के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप करते हुए न्यायालय की अवमानना की। उन्होंने  जिला जज सुधीर कुमार के माध्यम से रिपोर्ट हाईकोर्ट भेजी है। 
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डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीलीभीत के डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। बीते दिनों डीएम जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रगति गुप्ता व स्टाफ के साथ किशोर न्याय बोर्ड के न्यायालय में पहुंच गए। जज से कहा, आप मुझे पहचानती नहीं। किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट सुम्बुल इरशाद ने इसे कोर्ट की अवमानना मानते हुए जिला जज सुधीर कुमार के माध्यम से रिपोर्ट हाईकोर्ट भेज दी। 

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प्रधान मजिस्ट्रेट का कहना है कि निरीक्षण के समय वह एक मुकदमे में गवाह के बयान अंकित कर रही थीं। उस समय डीएम व उनका स्टाफ उनका वीडियो बनाने लगा। कहने के बाद भी नहीं माने। किशोर खुद को असहज महसूस करने लगे। जिस कारण बयान की कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई, न्यायिक कार्य बाधित हुआ।

17 फरवरी का है घटनाक्रम

किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट सुम्बुल इरशाद ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भेजे पत्र में पीलीभीत के डीएम प्रवीण लक्षकार व जिला प्रोबेशन अधिकारी और उनके सहयोगियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की बात कही है। पत्र में उन्होंने कहा है कि 17 फरवरी की दोपहर 12.05 बजे वह किशोर न्याय बोर्ड के एक मामले में गवाह का बयान दर्ज कर रही थीं। 

इस दौरान बोर्ड के अन्य सदस्य भी वहां मौजूद थे। एकाएक डीएम, जिला प्रोबेशन अधिकारी अपने स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों के साथ बगैर अनुमति अदालत कक्ष में घुस आए। जज सुम्बुल इरशाद अपने काम में व्यस्त रहीं। इस पर डीएम ने उनसे पूछा कि क्या आप मुझे नहीं जानती हैं। यह सुनकर जज ने कहा कि- आप मुझे गवाह का बयान अंकित करने दें, इस समय मैं न्यायिक कार्य कर रही हूं। 

स्टाफ बनाने लगा वीडियो 

प्रधान मजिस्ट्रेट ने कहा कि ड्यूटी के दौरान उठकर खड़ी नहीं हो सकती। तब डीएम ने कहा कि हम तो खड़े ही हैं। हमें तो पता ही नहीं था इतने समय से यहां किशोर न्याय बोर्ड चल रहा है। आज तक आप कार्यालय में मिलने भी नहीं आईं। इतना ही नहीं, हद यह हो गई कि जब जज गवाह का बयान अंकित कर रही थीं, तब जिला मजिस्ट्रेट का स्टाफ उनका वीडियो बना रहा था। उनके सुरक्षाकर्मी पुलिस की वर्दी में कक्ष में मौजूद थे।

जज ने पत्र में लिखा है कि डीएम व उनके स्टाफ ने न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप करते हुए प्रोसेस रजिस्टर, पुरानी फाइलें आदि देखी। बोर्ड के सदस्यों से पूछने लगे कि पुरानी फाइलों का निस्तारण क्यों नहीं कर रहे हो। जज ने पत्र में लिखा है कि प्रशासनिक अधिकारियों के इस कृत्य से गवाह का बयान अंकित करना असंभव हो गया। जिस कारण जज न्यायिक कार्यवाही रोककर अपने चेंबर में चली गईं।
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जज का कहना है कि डीएम, जिला प्रोबेशन अधिकारी और सभी स्टाफ ने न्यायालय के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप करते हुए न्यायालय की अवमानना की। उन्होंने हाईकोर्ट से प्रार्थना की है डीएम पीलीभीत, जिला प्रोबेशन अधिकारी पीलीभीत और उनके स्टाफ के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई की जाए। डीएम के इस रवैये से जिले के अधिवक्ता नाराज हैं।

डीएम के कृत्य से नाराज अधिवक्ताओं ने किया कार्य बहिष्कार

बुधवार को जब अधिवक्ताओं को इस प्रकरण की जानकारी हुई तो उनमें आक्रोष फैल गया। सेंट्रल बार एसोसिएशन, सिविल बार एसोसिएशन, संयुक्त बार एसोसिएशन के पदाधिकारी ने संयुक्त बैठक के बाद डीएम के इस कृत्य पर नाराजगी जताते हुए इसे अदालत की अवमानना माना। उन्होंने जोधपुर में पिछले दिनों हुई अधिवक्ता की नृशंस हत्या व उक्त प्रकरण को लेकर बृहस्पतिवार को भी कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी।

दो दिन पहले विधायक ने कहा था- डीएम बैठाते हैं फरियादियों की कुर्सी पर

डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार अदालत की अवमानना के साथ ही सत्ता पक्ष के विधायकों के निशाने पर भी आ गए हैं। दो दिन पूर्व ही बीसलपुर विधायक विवेक कुमार ने प्रमुख सचिव विधानसभा ब्रजभूषण दुबे से डीएम की लिखित शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि डीएम खुद बड़ी कुर्सी पर बैठते हैं। एसपी के लिए पास में छोटी कुर्सी डालते हैं जबकि विधायकों को सामने फरियादियों वाली कुर्सी पर बैठाते हैं। यह विधानसभा सदस्यों का अपमान है। बरखेड़ा विधायक स्वामी जयद्रथ प्रवक्ता नंद ने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इस मामले में डीएम से जवाब मांगा गया है।
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