अपने वेतन से कर्मचारी अंशदान कटवाकर भविष्य निधि खाते में धनराशि जमा कराते रहे हैं, इसमें नियोक्ता का अंश अलग होता है। किसी पीएफ सदस्य को जरूरत पड़ने पर इसी जमा राशि से लोन भी दिया जाता है। पीएफ कार्यालय में सब कुछ ऑनलाइन होने से लोन तीन दिन में स्वीकृत हो जाता है, लेकिन बैंक कर्मचारी खातों में समय से धनराशि नहीं जमा कर रहे हैं।
क्षेत्रीय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय स्वीकृत लोन, रिटायर कर्मी के दावे और अन्य भुगतानों की धनराशि एसबीआई मुख्य शाखा को उपलब्ध करता है। एसबीआई में फैली मनमानी के चलते एक एक सप्ताह तक संबंधित खातों में पैसा नहीं पहुंच रहा है। प्रभावित लोग हर दिन पीएफ कार्यालय में चक्कर लगाते रहते हैं, उन्हें लगता है कि शायद पीएफ कार्यालय भ्रामक जानकारी दे रहा है। जब लोग पीएफ कार्यालय से चेक नंबर आदि लेकर बैंक जाते हैं तो वहां बता दिया जाता है कि अभी भुगतान नहीं आया है। लगातार बढ़ रहीं शिकायतों की पुष्टि की गई तो पता चला कि नौ मई से पांच चेक भुगतान के लिए एसबीआई आए था, लेकिन इन्हें संबंधित खातों में समायोजित नहीं कराया गया है।