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Bareilly News: कैंसर की चपेट में आकर जान गंवा रहे पालतू श्वान

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बरेली। मनुष्यों की तरह श्वानों को भी कैंसर अपनी चपेट में ले रहा है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने संक्रमित श्वान से संसर्ग और रसायनिक उत्पाद का इस्तेमाल से चपेट में आने की आशंका जताई है। त्वचा, स्तन, मुंह के कैंसर की चपेट में पालतू श्वान मिल रहे हैं। आईवीआरआई में प्रतिमाह 8-10 मामले इस तरह के आ रहे है।
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आईवीआरआई रेफरल पॉलीक्लीनिक और वन्यजीव केंद्र प्रभारी डॉ. अभिजीत पावडे के मुताबिक करीब दस वर्ष पूर्व भी श्वान कैंसर की चपेट में आते थे, लेकिन जांच कराने कम ही लोग पहुंचते थे। साल भर में कैंसर की चपेट में करीब 20 श्वान मिलते थे। अब जांच सुविधा और श्वानाें को रोग से निजात दिलाने की चाहत बढ़ी है। बावजूद इसके छिटपुट तकलीफ को पालक नजरंदाज करते हैं। तब तक कैंसर फैल चुका होता है। जो श्वान चपेट में मिलते हैं, उनमें तीसरी या चौथी स्टेज का कैंसर मिलता है। लिहाजा, थेरेपी, दवा के बावजूद जीवन प्रत्याशा कम ही रहती है।
बताया कि श्वानों के अलावा भी दुधारू व वन्य पशुओं में भी कैंसर होता है, लेकिन श्वान पालतू होते हैं और इंसानों के पहरेदार माने जाते हैं। इसलिए इनमें लक्षण उभरने पर लोग जल्द इलाज के लिए पहुंचते हैं। जबकि अन्य पशुओं में स्थिति बेहद गंभीर होने पर ही इलाज कराते हैं।
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कैनाइन ट्रांसमिसिबल वेनेरियल, लिकर सेल टयूमर वजह
डॉ. पावड़े के मुताबिक प्रजनन के लिए संसर्ग के दौरान मादा श्वान से नर श्वान कैनाइन ट्रांसमिसिबल वेनेरियल ट्यूमर (सीटीबीटी) से संक्रमित होता है। यही नर जब अन्य मादा श्वान से संसर्ग करता है तो उसे संक्रमित कर सकता है। इसे कैनाइन ट्रांसमिसिबल वेनरल ट्यूमर कहते हैं। इसके अलावा श्वानों में लिकर सेल ट्यूमर भी कैंसर की वजह बनता है। जिससे मुंह का कैंसर होता है। पुष्टि के लिए श्वानों की ऊतक विकृति हिस्टोपैथोलॉजी जांच की जाती है।

डॉ. पावड़े के मुताबिक श्वानों में कैंसर की पुष्टि के लिए इंसानों की तर्ज पर ही एक्सरे, बायोप्सी, सीटी स्कैन, अल्ट्रासोनोग्राफी, पीईटी स्कैन होता है। रोग की पुष्टि के बाद रेडियो, कीमो थेरेपी और इंजेक्शन, दवा लगते हैं। महंगे इलाज के बावजूद जीवन प्रत्याशा बेहद कम होती है। हालांकि, देश में पशुओं की थेरेपी के लिए कुछ ही संस्थानों में संसाधन हैं। बताया कि प्रतिमाह आठ से दस श्वान कैंसर की चपेट में मिल रहे हैं।

हार्मोनल असंतुलन, रसायनिक कीटनाशक वजह
डिविजन ऑफ इम्युनोलॉजी की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सोनल श्रीवास्तव के मुताबिक पालतू श्वान, मनुष्यों के प्रयोग होने वाले रसायनिक उत्पाद साबुन, शैंपू व अन्य के संपर्क में आने से त्वचा कैंसर की आशंका रहती है। मादा श्वान में गर्भधारण रोकने के लिए दी जा रही दवा से एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रान हार्मोन के असंतुलन से स्तन कैंसर, उच्च वसा, प्रसंस्कृत भोजन, वजन का बढ़ना, घटती रोग प्रतिरोधी क्षमता से अन्य ट्यूमर होते हैं। ब्यूरो
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