किताबें पढ़ने के शौकीन शारिक शबाब जैदी, वंश चतुर्वेदी और अंशिका जौहरी
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द्रौपदी कन्या इंटर कॉलेज
द्रौपदी कन्या इंटर कॉलेज में भी वर्षों पुरानी एक लाइब्रेरी बनी हुई है। लोग बताते हैं कि लाइब्रेरी में मधुशाला जैसी कालजयी रचनाएं हैं, लेकिन लंबे समय से उन्हें किसी ने खोलकर देखा तक नहीं। स्कूल की छात्राएं कोर्स की किताबों में ही मशगूल रहती हैं। शिक्षकों को भी खास रुचि नहीं है। कांच के शोकेस में बंद किताबें मानो कहती हों कभी हमारे भी पन्ने उलट लिए जाएं।
जीआईसी
जीआईसी में भी लाइब्रेरी का कोई रखरखाव नहीं है। किताबें जिन अलमारियों में बंद हैं, उन्हें सालों से खोला नहीं गया। धूल की एक मोटी परत चारों ओर जमी है। लंबे समय से अच्छे लेखकों ने लाइब्रेरी में दस्तक भी नहीं दी। बरसों पुरानी किताबें अलमारियों में कैद हैं। कुछ एक किताबें बढ़ती भी हैं तो किसी संस्था के द्वारा दान किए जाने पर। यही हाल बाकी माध्यमिक स्कूलों का भी है।
अब नहीं आता रख-रखाव के लिए बजट
माध्यमिक स्कूलों को काफी समय पहले तक रखरखाव के लिए बजट दिया जाता था, जो कि अब लंबे समय से मिलना बंद हो गया है। विभाग का कहना है कि अब कंपोजिट ग्रांट दी जाती है उसी से विद्यालय के जरूरी काम पूरे करने होते हैं।
इसलिए मनाते हैं राष्ट्रीय पठन दिवस
देश में पुस्तकालय आंदोलन के जनक कहे जाने वाले पीएन पैनिकर की पुण्यतिथि 19 जून को होती है। उनके सम्मान के तौर पर इस दिन को राष्ट्रीय पठन दिवस के तौर पर मनाया जाता है। पीएन पैनिकर केरल के रहने वाले थे। एक मार्च 1909 को पैदा हुए। 19 जून 1995 में मृत्यु हुई।