उत्पाद शुल्क तीन गुना बढ़ने से कारोबारियों में बढ़ी चिंता
बरेली। चीन से फिलहाल युद्ध के आसार ही हैं लेकिन फिर भी खिलौना बाजार तबाही की कगार पर आ खड़ा हुआ है। तमाम दूसरे उत्पादों की तरह चीन से खिलौनों का आयात रुकने का भारतीय खिलौना बाजार पर साफ असर दिखने लगा है। एक सितंबर से चीन से आने वाले खिलौनों की टेस्टिंग अनिवार्य कर दिए जाने जैसे नियम लागू होने के बाद इस संकट के और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारत सरकार ने हाल ही में जो निर्णय लिए हैं, उनके तहत चीन से 20 जुलाई तक ही माल भारत आ पाएगा। भारत रवाना हुए चीन के कई मालवाहक जहाज रास्ते में रोक लिए गए हैं। चीनी खिलौनों पर उत्पाद शुल्क भी तीन गुना बढ़ा दिया गया है। खिलौना कारोबारियों का कहना है कि भारत में खिलौना उद्योग इस हालत में नहीं है कि मांग पूरी कर सके। दूसरा पहलू यह है कि चीन से आयात बंद होने से खिलौनों की कीमत बढ़ेगा और नतीजा यह होगा कि पहले से मुश्किल झेल रहे खिलौना बाजार को और बड़े संकट का सामना करना पड़ेगा। लोगों को अपने बच्चों के लिए खिलौने खरीदने को जब ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी और इसके बाद भी उनकी जरूरत पूरी नहीं होगी तो इसका असर मार्केट पर पड़ना लाजमी है।
खिलौना कारोबारियों के मुताबिक चीन से रवाना हुए कुछ जहाज भारतीय सीमा पर चेकिंग के लिए सीमा शुल्क टीम ने रोक लिए हैं, कई जहाज रास्ते में बताए जा रहे हैं। इससे साफ है कि चीनी उत्पाद बाजार में आने में समय लगेगा। यह भी तय नहीं है कि नए हालात में भारत इन जहाजों को आने की इजाजत देगा भी या नहीं। इसके अलावा चीन में बने खिलौनों पर तीन गुना उत्पाद शुल्क लागू होगा और फिर चीनी उत्पादों को भारतीय मानक ब्यूरो की लैब में भी परखा जाएगा तो चीन के उत्पाद आने काफी कम हो जाएंगे क्योंकि तमाम चीनी उत्पादों का लैब में फेल होना तय है। खिलौना कारोबारियों के लिए ताजा हालात चिंताजनक हैं। उनका कहना है कि चीनी खिलौनों का विकल्प फिलहाल भारत में नहीं है।
बैटरी से चलने वाले खिलौनों की मांग भारत में सबसे ज्यादा
बाजार सस्ती और उच्च तकनीक से बने खिलौनों का आदी हो चुका है। भारतीय लोगों की यह उम्मीद चीनी खिलौने ही पूरी कर पाते हैं। चीन से आने वाले बैटरी चालित खिलौनों की मांग इसीलिए ज्यादा है। कारोबारी बताते हैं कि भारत में चीनी उत्पाद का कोई विकल्प नहीं बनाया गया इसलिए उन्हें और ग्राहकों दोनों को चीनी खिलौनों पर निर्भर होना पड़ा। सरकार की नीतियां ही इसके लिए दोषी रही हैं। अब नोएडा में टॉय पार्क बनाने की कवायद शुरू की गई है। देश भर में खिलौना बाजार में बीस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार होता है। बरेली में खिलौनों का सालाना कारोबार बीस करोड़ रुपये से ज्यादा बताया जाता है।
भारत में बने खिलौने मांगते हैं पर खरीदते नहीं
कारोबारियों के मुताबिक बाजार में आने वाले तमाम लोग देश में बने खिलौनों की मांग तो करते हैं लेकिन ये खिलौने जब उनके सामने रखे जाते हैं तो उन्हें लगता है कि उनकी जरूरत उनसे पूरी नहीं हो पाएगी। कोई और विकल्प न मिलने से वे मायूस हो जाते हैं। दुकानदारों के मुताबिक बच्चों के शौक पूरे करने के लिए लोग खिलौनों पर खूब खर्च करते हैं लेकिन उनकी प्राथमिकता बैटरी से चलने वाले उच्च तकनीक के खिलौने ही होते हैं।
बाजार में इलेक्ट्रॉनिक यानी बैटरी चालित खिलौनों की मांग ज्यादा रहती है जो ज्यादातर चीन से ही आते हैं। चीन से माल आने में समस्या आ रही है। बीच में माल अटका हुआ है। नए आर्डर देने का कोई फायदा नहीं है। हालांकि लोगों का भारतीय खिलौनों में भी रुझान दिख रहा है। उत्पाद शुल्क बढ़ने से खिलौने महंगे होना तय हैं। - विकास नागपाल, खिलौना कारोबारी राजेंद्रनगर
खिलौना बाजार पुराने स्टॉक से चल रहा है। बाजार में मांग भी फिलहाल कम है। धीरे-धीरे चीन के खिलौनों की उपलब्धता कम होगी। चीन से रिश्ते बिगड़ने का कारोबार पर प्रभाव पड़ेगा। सरकार को देश में ही चीन को टक्कर देने के लिए विकल्प तैयार करने चाहिए। फिलहाल खिलौना बाजार काफी हल्का चल रहा है। - मोनू चावला, खिलौना कारोबारी कुतुबखाना