बरेली। मनरेगा का नाम बदलकर वीबी-जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) किए जाने के बाद पोर्टल की तकनीकी खामियों का खामियाजा मजदूरों और वेंडरों को भुगतना पड़ रहा है। जिले के 1.69 लाख मजदूरों के ढाई करोड़ रुपये का मेहनताना अटक गया है, जबकि निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने वाले वेंडरों के करीब 62 करोड़ रुपये का भुगतान दो वर्षों से लंबित है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, योजना का नाम बदलने के साथ पोर्टल में भी तकनीकी बदलाव किए गए, लेकिन जिले में अभी तक नई व्यवस्था पूरी तरह सुचारु नहीं हो सकी है। पंचायतों की ओर से कराए जा रहे कार्यों का विवरण, मस्टर रोल और भुगतान संबंधी सूचनाएं समय से अपडेट नहीं हो पा रही हैं। नतीजा, भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे श्रमिक आर्थिक संकट झेल रहे हैं और वेंडर भी परेशान हैं। ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है।
वेंडरों ने निर्माण खींचे हाथ
ग्राम पंचायतों में सीसी रोड, नाली, इंटरलॉकिंग और अन्य निर्माण कार्यों के लिए सामग्री उपलब्ध कराने वाले वेंडरों ने अब सामग्री की आपूर्ति रोकने या सीमित करने की बात कही है। यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो विकास कार्यों की रफ्तार थम सकती है।
वर्जन
पोर्टल अपडेशन और तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है। जैसे ही पोर्टल पूरी तरह संचालित होगा, भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। - चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक, डीआरडीए