सेल्समैन के घर जांच करने पहुंची पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
वितरक और सूदखोर करते थे अपमानित, लॉकडाउन में धंधा हो गया था चौपट
बरेली। सेल्समैन संजीव शर्मा तीन साल पहले सूदखोर के जाल में ऐसे फंसे कि फिर निकल ही नहीं सके। पहले तो रुपये कमाकर सूदखोर की जेब भरते रहे, लेकिन लॉकडाउन में धंधा चौपट हुआ तो आर्थिक तंगी ने घेर लिया। माल लेने के बावजूद वितरकों का हिसाब चुकता न कर पाए तो वे भी दबाव बनाने लगे। बृहस्पतिवार को उन्हें बाइक छीन लेने की धमकी दी गई। इससे संजीव इस कदर हताश हो गए कि जान दे दी।
संजीव शर्मा के परिवार में पत्नी सोनी शर्मा और तीन बेटे ध्रुव, प्रयाग और अंश हैं। बड़े भाई शैलेंद्र शर्मा भी साथ ही रहते हैं। दोनों भाई कन्फेक्शनरी के सेल्समैन हैं। वितरकों से सामान लेकर दुकानों पर सप्लाई करते हैं। सोनी ने बताया कि पहले तो हर आठवें दिन वितरकों का हिसाब हो जाता था, लेकिन लॉकडाउन में यह सिलसिला टूट गया। इसके चलते एक वितरक का 40 हजार और दूसरे का 50 हजार रुपये का कर्जा हो गया। व्यापारी अक्सर फोन करके रुपये मांगते थे। वहीं, बदायूं रोड के एक सूदखोर से तीन साल पहले संजीव ने 50 हजार रुपये का कर्जा लिया।
सूदखोर को वह अब तक एक लाख से ज्यादा नकद और 50 हजार का चेक दे चुके थे। इसके बावजूद सूदखोर रुपये बकाया बताता था। आए दिन उनका रास्ता रोक लेता था और तकाजा करके अपमानित करता था। लॉकडाउन में काम बंद होने से रुपये नहीं दे सके तो वह बाइक छीनने की धमकी देने लगा, इससे वह परेशान थे। मगर विवाद बढ़ने के डर से पुलिस से शिकायत नहीं की। वहीं, बृहस्पतिवार को एक वितरक ने फोन करके रुपये न देने पर बाइक छीन लेने की बात कही। इसके कारण वह तनाव में थे लेकिन घरवालों को कोई बात नहीं बताई। आर्थिक तंगी से परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया था।
पुलिस ने परिवार वालों से ली घटना की जानकारी
संजीव की मौत के बाद सुभाषनगर की मढ़ीनाथ चौकी प्रभारी प्रदीप कुमार उनके घर पहुंचे। उन्होंने परिवार वालों से मामले की जानकारी ली। उन्हें भी सोनी ने वितरकों और सूदखोर द्वारा प्रताड़ित करने की बात बताई। मगर परिवार वालों ने अभी तक पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी है। एसपी सिटी रवींद्र कुमार का कहना है कि अगर तहरीर आएगी तो रिपोर्ट लिखकर कार्रवाई की जाएगी।