बरेली। करोड़ों की लागत से बने स्मार्ट सिटी के फुटपाथ बिकते हैं। जिम्मेदार ही इसका सौदा करते हैं। अतिक्रमण हटाओ अभियान से पहले ही इसकी मुखबिरी हो जाती है। सूचना पाकर कब्जेदार पहले ही उस जगह को खाली कर देते हैं। इस वजह से अतिक्रमणकारी बेखौफ होकर सड़कों के किनारे धंधा कर रहे हैं। रोड पटरी पर ठेले, गुमटी से लेकर रेस्टोरेंट और बाइक शोरूम तक खुल गए हैं। कई जगह मैकेनिकों ने सड़क के किनारे ही ऑटो व ट्रकों की मरम्मत के गैराज खोल रखे हैं। इससे आए दिन शहर में जाम लगता है, लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।
वार्ड एक की पार्षद संतोष कश्यप के बेटे रिषभ ने बताया कि कार्यकारिणी में शामिल उनकी मां, सागर मौर्य, अंजुल गंगवार, रितिका किशोर, हरिशंकर लोधी, सौरभ, नीरज और उपसभापति सर्वेश रस्तोगी ने राजकीय इंटर कॉलेज के पास अतिक्रमण की शिकायत की थी। 25 दिन के बाद नगर निगम की टीम वहां पहुंची, लेकिन इससे पहले इसकी सूचना पहुंच गई। इस वजह से कब्जेदार ने पहले ही कब्जा हटा लिया। निगम की टीम ने फोटो खींचे और अपनी कार्रवाई बता दी। अब वहां दोबारा कब्जा हो गया है। अतिक्रमण हटाओ अभियान के प्रभारी कह रहे हैं कि आप लोग थाने जाएं। रिषभ ने आरोप लगाया कि जहां पैसे बंधे होते हैं, जिम्मेदार वहां नहीं जाते।
ये है हाल
शाहजहांपुर रोड पर श्यामगंज से सेटेलाइट तक टायर, ऑटो व ट्रक सर्विस की दुकानें सजी हैं। इन दुकानों और कारीगरों ने पूरा फुटपाथ घेर रखा है। मालियों की पुलिया से आगे सड़क के दोनों ओर बस और ट्रक सड़क पर ही खड़े रहते हैं। बटलर प्लाजा के सामने सड़क पर ही फास्ट फूड के ठेले लगे रहते हैं। इन्होंने फुटपाथ पर टेबल और कुर्सियां डालकर अस्थायी रेस्टोरेंट बना रखा है। यहां कई बार अभियान चलाया गया, लेकिन फिर अतिक्रमण हो जाता है। सिविल लाइंस में कोतवाली, जीआईसी गेट और इस्लामिया मार्केट सहित कई जगह रोड पटरी पर ही कपड़ों की दुकानें सजती हैं। खरीदार आधी सड़क घेर लेते हैं। इस वजह से वहां जाम लगता है।
दोबारा अतिक्रमण क्यों हुआ? इसकी जांच कराएंगे। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। फुटपाथ का सौदा करने के मामले की भी जांच कराई जाएगी। सत्यता पाए जाने पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
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