बरेली। जिला अस्पताल में तकनीकी सुविधाओं के साथ ही मरीजों की तादाद भी बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों और उपकरणों के संचालन के लिए स्टाफ की कमी भारी पड़ रही है। हृदय, गुर्दा व त्वचा रोग के विशेषज्ञों की तैनाती नहीं होने की वजह से मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।
महिला अस्पताल में भी महिला चिकित्सक, रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से गर्भवतियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के रिकॉर्ड पर गौर करें तो एक दशक पहले प्रतिमाह 40 हजार मरीजों की ओपीडी होती थी जो अब 90 हजार तक जा पहुंची है। सर्जरी केस भी प्रतिमाह डेढ़ सौ पहुंच रहे हैं। इमरजेंसी वार्ड के बेड अक्सर मरीजों से भरे रहते हैं। विशेषज्ञों के अभाव की वजह से कई बार मरीजों की जान सांसत में भी पड़ने की आशंका रहती है।
जिला अस्पताल की एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा के मुताबिक डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति के लिए शासन को समय-समय पर पत्र भेजा जा रहा है। अभी तक कोई स्थायी तैनाती नहीं हुई है। बीते दिनों इंटर्न डॉक्टरों की वजह से समस्या का कुछ हद तक समाधान हुआ है।
चार महिला विशेषज्ञों की कमी, रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं
जिला महिला चिकित्सालय में चिकित्सकों के आठ स्थायी पद हैं। इनमें चार पर ही महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती अब तक नहीं हो सकी है। संबद्ध रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे सप्ताह में महज तीन दिन ही गर्भवतियों व महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच हो रही है। सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने विशेषज्ञ डॉक्टर, रेडियोलॉजिस्ट के लिए सीएमओ को लिखा है।
तीन सौ बेड अस्प्ताल को भी डॉक्टरों का इंतजार
कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुआ तीन सौ बेड अस्पताल भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। जिला अस्पताल के सहयोग से ओपीडी का संचालन शुरू हुआ है पर करोड़ों के उपकरण धूल फांक रहे हैं। इसमें 36 वेंटिलेटर समेत हाई फ्लो नेजल कैनुला, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, ऑक्सीजन प्लांट, मैनिफोल्ड का संचालन नहीं हो सका है।