बरेली। एंटीकरप्शन कोर्ट ने 25 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़े गए चाइल्ड लाइन के कोआर्डिनेटर सौरभ गंगवार को जेल भेज दिया है। इससे पहले एंटीकरप्शन टीम ने उससे लंबी पूछताछ की, जिसमें चाइल्ड लाइन की काउंसलर व बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष पर लगे आरोप साबित नहीं हो सके। इसलिए दोनों लोगों को राहत देते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
एंटीकरप्शन टीम ने सौरभ गंगवार को शुक्रवार को सिविल लाइन क्षेत्र में पेट्रोल पंप पकड़ा था। वह नाबालिग लड़की की शादी करने वाले माता-पिता को धमकाकर 25 हजार रुपये घूस ले रहा था। उसने उन्हें बाल कल्याण समिति से क्लीनचिट दिलाने का झांसा दिया था। कोतवाली में उससे पूछताछ की गई तो उसने अन्य लोगों के नाम लेकर टीम को उलझाया। पूछताछ के बाद शनिवार को उसे जेल भेज दिया गया।
बताया जा रहा है कि सौरभ ने खुद को बेकसूर साबित करने के लिए काउंसलर और समिति के अध्यक्ष के नाम लिए थे। हालांकि पूछताछ में जब तथ्यों का सत्यापन किया गया तो हकीकत कुछ और ही निकली। काउंसलर के साथ नहीं बल्कि वह खुद ही किशोरी के घर परिजनों को धमकाने गया था। किशोरी को पेश कर सुनवाई भी नहीं हो पाई थी और सौरभ खुद ही अध्यक्ष के नाम से रुपये मांग रहा था। अब अधिकारी विवेचना आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं। सीओ एंटीकरप्शन यशपाल सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ और साक्ष्य जुटाकर चार्जशीट लगाई जाएगी।
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फरार अफसरों को नहीं खोज पाए जिम्मेदार
एंटीकरप्शन विभाग की कार्रवाई में संविदा कर्मी तो पकड़ लिए जाते हैं, लेकिन बड़ों पर कार्रवाई नहीं होती। उदाहरण के तौर पर बिजली विभाग के दो एसडीई और होमगार्ड के जिला कमांडेंट फरार चल रहे हैं, जबकि इनके लिए घूस लेते पकड़े गए संविदा कर्मचारी जेल की हवा खा रहे हैं। आरोपियों में शामिल एक एसडीई हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले आया है जबकि बाकी दोनों अधिकारी फरार हैं।