बरेली। महिला अस्पताल में साल दर साल मरीजों की तादाद बढ़ रही है। सालाना ओपीडी एक लाख तक पहुंच गई है, लेकिन संसाधन सीमित हैं। चिकित्सकों समेत तकनीकी व पैरामेडिकल स्टाफ का भी अभाव है। आलम यह है कि मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) विंग में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर तक की तैनात नहीं है। एक रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे अल्ट्रासाउंड जांच होती है। इस वजह से गर्भवती को तारीख मिलती रहती है।
वर्ष 2025 में करीब एक लाख मरीज (हर कार्यदिवस में चार सौ) ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे। 18 हजार अल्ट्रासाउंड जांचें हुईं। 18,170 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। 4.46 लाख पैथोलॉजी जांचें हुई। 3,836 सामान्य और 1,886 सिजेरिन प्रसव हुए। इसके दूसरे पहलू पर गौर करें तो अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत 16 पदों के सापेक्ष 10 की ही तैनाती है। एमसीएच विंग में स्वीकृत 17 पदों के सापेक्ष महज आठ की तैनाती हैं। ईएमओ के छह, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, गायनेकोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिक के एक-एक पद रिक्त हैं।
सीमित मानव संसाधन की वजह से ओपीडी में रोजाना महिला मरीजों की कतार दोपहर दो बजे बाद तक लगी रहती है। ज्यादातर समय ओपीडी जूनियर डॉक्टरों के भरोसे होती है। महिला रोग विशेषज्ञ राउंड, मेडिको लीगल, डिलीवरी आदि कार्यों में ही व्यस्त रह जाती हैं।
चीफ फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं
महिला अस्पताल में चीफ फार्मासिस्ट के तीन पद स्वीकृत हैं, पर तैनाती एक की भी नहीं है। रेडियोलॉजिस्ट के एक पद पर डॉ. सीपी सिंह तैनात हैं। निजी मेडिकल कॉलेज का एक इंटर्न सहयोगी है। डॉ. सिंह जब कोर्ट केस व अन्य कार्यों से बाहर जाते हैं तो विशेषज्ञ परामर्श में दिक्कत आती है। बीते दिनों अल्ट्रासाउंड जांच में जुड़वा बच्चों को दर्ज करने के मामले में इंटर्न ही जिम्मेदार था।
तीन मशीनों में से एक ही संचालित
एमसीएच विंग में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटर में जांच के लिए तीन मशीनें लगी हैं। ये करीब आठ-दस साल पुरानी हैं। दो मशीनों का प्रिंटर न होने से एक ही मशीन पर रोजाना 60-70 जांचें हो रही हैं, जबकि जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या सौ से अधिक रहती है। इस वजह से उन्हें अगली तिथि पर बुलाया जाता है। गर्भवतियों को जांच के लिए जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड पर भी भेजा जाता है। ब्यूरो
वर्षवार आंकड़े
वर्ष ओपीडी पैथोलॉजी अल्ट्रासाउंड इंडोर प्रसव (सामान्य-सिजेरियन)
2021 57,473 3,22,018 6,359 13,004 3,065-1,204
2022 69,009 3,64,740 9,233 16,049 3,583-1,324
2023 71,000 3,84,835 6,560 15,704 3,364-1,391
2024 79,472 4,23,490 13,571 17,111 3,462-1,691
2025 96,489 4,46,685 17,937 18,170 3,836-1,886
(नोट: आंकड़े महिला चिकित्सालय से प्राप्त)
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घंटेभर लाइन में लगे, नहीं आई बारी
फोटो
ओपीडी में बहू को दिखाने आए थे। घंटेभर लाइन में लगे रहे, लेकिन बारी नहीं आई। साथ आए बच्चे परेशान हुए। - नजमा, सनैयारानी
प्रसव के बाद पत्नी को दिक्कत होने पर परामर्श के लिए आए थे। गोद में छोटा बच्चा है, उसे लेकर घंटेभर बैठे रहे। - नसीर, कुतुबखना
बेटी की अल्ट्रासाउंड जांच कराने आए थे। घंटेभर बाद कहा कल आना। फिर टीका लगवाने के लिए लाइन में लगे। - मायता बेगम, बाकरगंज
ईएमओ न होने से इमरजेंसी में विशेषज्ञ डॉक्टर को बैठना पड़ता है। एक-एक डॉक्टर पर कई चार्ज हैं। रिक्त पदों के सापेक्ष डॉक्टरों की तैनाती के लिए पत्राचार किया जा रहा है। अल्ट्रासाउंड मशीनें सही हैं। प्रिंटर न होने से उपयोग नहीं हो पा रहा। सीमित संसाधनों में भी मरीजों को बेहतर सेवा मुहैया कराई जा रही है। - डॉ. त्रिभुवन प्रसाद, सीएमएस, महिला चिकित्सालय