बरेली। दुर्घटना में घायल मरीज का डॉक्टर ने अपने अस्पताल में इलाज किया। तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो बिना ऑक्सीजन वाली एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल भेज दिया। एंबुलेंस में ऑक्सीजन न मिलने से मरीज की मौत हो गई। कोर्ट के आदेश पर डाॅक्टर के खिलाफ कैंट थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई।
देवपाल सिंह ने अदालत में प्रार्थनापत्र देकर बताया कि अप्रैल 2023 में टेंपो पलटने से उनके बड़े भाई वेदपाल घायल हो गए थे। एक परिचित ने उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। सूचना पर पहुंचे देवपाल सिंह ने भाई को बुखारा मोड़ स्थित अधृत निशांत अदिति अस्पताल में भर्ती करा दिया। कुछ देर बाद ही डाॅ. निशांत अस्पताल में डाॅक्टर न होने का बहाना बनाकर मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कहने लगे। उन्होंने बिना ऑक्सीजन वाली एंबुलेंस बुलाकर स्टाफ के जरिये वेदपाल को उसमें लेटा दिया।
एंबुलेंस चालक ने ऑक्सीजन लगाने की बात कही तो डाॅ. निशांत ने विश्वास दिलाया कि ले जाओ, मरीज को कुछ नहीं होगा। अस्पताल से निकलते ही ऑक्सीजन की कमी के कारण वेदपाल की मौत हो गई। आरोप है कि डाॅ. निशांत ने कैंट थाने में वेदपाल के परिजनों द्वारा तोड़फोड़ करने की फर्जी सूचना दे दी। देवपाल ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नही हुई तो उन्होंने कोर्ट की शरण ली।
एंबुलेंस चालक के बयान से फंसे डॉक्टर
एंबुलेंस चालक अरविंद कुमार ने अदालत में शपथपत्र देकर बताया कि उसका ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो गया था। उसने डाॅक्टर से ऑक्सीजन सिलिंडर की मांग की थी। मरीज को छोड़कर सिलिंडर लौटाने का वादा भी किया था पर डाॅक्टर ने मरीज को खतरा नहीं होने की बात कहकर भेज दिया। इस कारण वेदपाल की मौत हो गई। कोर्ट ने एंबुलेंस के चालक के बयान को अहम माना और रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया। वहीं, डाॅक्टर ने कोर्ट में बताया कि एंबुलेंस पर आगरा के थ्री व्हीलर का नंबर है। थ्री व्हीलर एंबुलेंस नहीं हो सकता। अदालत ने पुलिस को इस बिंदु पर भी जांच करने के निर्देश दिए हैं।