बरेली। शहर के सेटेलाइट और पुराना रोडवेज बस अड्डा पर रक्षाबंधन के दौरान यात्रियों का दबाव तीन गुना तक बढ़ जाएगा। इसके बाद भी यहां व्याप्त अव्यवस्थाओं को दूर करने पर जोर नहीं दिया जा रहा। ऐसे में आम यात्रियों के साथ बहनों को भी मुश्किल होगी।
दोनों बस अड्डों से सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 700 से ज्यादा बसों और 32 हजार से ज्यादा यात्रियों का आवागमन होता है। पिछले 15 साल से दोनों बस अड्डों पर यात्री सुविधाओं की बेहतरी के लिए काम नहीं कराए गए हैं। दोनों बस अड्डों पर पीने के पानी के संसाधन सीमित हैं। इतना ही नहीं यात्रियों के बैठने के लिए बेंच भी नाकाफी हैं।
बसों और बस अड्डों की सफाई का जिम्मा निजी फर्म पर है, इसके बाद भी हालात बदतर हैं। मामूली बारिश में ही यहां जलभराव हो जाता है। सेटेलाइट बस अड्डा परिसर में ही ठेले-खोमचे लगाकर वसूली की जा रही है। प्लेटफार्म संकरा होने के कारण बसों को रोड पर खड़ा करना पड़ता है। इससे यहां जाम लगता है। पुराने बस अड्डे का भी यही हाल है।
बसें भी खस्ताहाल
बस अड्डों के साथ ही बसें भी खस्ताहाल हैं। डिपो की रोजाना 10-10 बसें ब्रेक डाउन हो रही हैं। सामान्य दिनों में भी लोकल मार्गों पर यात्रियों को कई-कई घंटे बसों का इंतजार करना पड़ता है। कुछ मार्गों पर बसों की भरमार है तो तमाम ऐसे मार्ग भी हैं, जिन पर शाम छह बजे के बाद बसें न होने के कारण डग्गामारों का राज होता है। आरएम दीपक चौधरी ने बताया कि किसी तरह की समस्या नहीं होने दी जाएगी। सभी अधिकारियों को इस संबंध में चेताया गया है। संवाद