सवारियों के आने का इंतजार करते बस ड्राइवर और कंडक्टर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
पहले दिन मात्र चार दर्जन बसें ही सफर पर निकलीं
बरेली। रोडवेज बस स्टेशन पर पहले हालात ये रहते थे कि यात्रियों को घंटों इंतजार के बाद ही बसों में जगह मिल पाती थी, लेकिन लॉकडाउन के दो माह बाद सोमवार से बसों का संचालन शुरू हुआ तो नजारा उल्टा था। बसों को पूरे दिन यात्रियों का इंतजार करना पड़ा। लिहाजा सिर्फ चार दर्जन बसें ही सफर के लिए निकल सकीं। इनसे बमुश्किल हजार-बारह सौ मुसाफिरों ने ही यात्रा की।
रोडवेज बसों का संचालन सुबह निर्धारित समय 8:00 बजे शुरू किया गया। परिवहन निगम के तमाम अधिकारी और कर्मचारी सुबह ही स्टेशनों पर पहुंच गए। सवारियों को थर्मल स्क्रीनिंग करने के बाद ही प्लेटफार्म पर जाने दिया गया। बसों में बैठने से पहले कंडक्टर ने सभी सवारियों के हाथों को सैनिटाइज कराया। पुराने बस स्टेशन से लगभग डेढ़ दर्जन बसें ही दूसरे शहरों के लिए रवाना हुईं। इनमें मुश्किल से पांच-छह सौ यात्रियों ने ही सफर किया। दोपहर बाद यहां सन्नाटा पसर गया। बसें खड़ी रहीं, मगर सवारियों का अता-पता नहीं था। पुराने बस स्टेशन से वैशाली (दिल्ली), आगरा, मथुरा, कासगंज, अलीगढ़, बदायूं, मुरादाबाद, हापुड़ आदि स्थानों के लिए बसें भेजी गईं।
उधर, दिल्ली भेजी गईं बसों को वैशाली में प्रवेश करने से रोक दिया गया। वैशाली पहुंची एक बस के कंडक्टर ने क्षेत्रीय कार्यालय को फोन करके बताया कि वैशाली में रोडवेज बसों को नहीं घुसने दिया जा रहा है। उन्हें पहले ही रोक दिया गया है। बाद में अधिकारियों ने वैैशाली प्रशासन से वार्ता करके मामला निपटाया। सेटेलाइट बस स्टेशन से पहले दिन 30 से ज्यादा बसें रवाना की गईं। यहां से पीलीभीत, टनकपुर, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, लखनऊ और कानपुर के लिए बसें रवाना हुईं, लेकिन आठ-नौ सवारियों ने ही इनमें सफर किया। हुलासनगरा फाटक बंद होने की वजह से कुछ बसों को बीसलपुर और कुछ को जैतीपुर होते हुए शाहजहांपुर की दिशा में भेजा गया।
बसों को पूरी सुरक्षा और गाइडलाइन के अनुसार ही संचालित किया जा रहा है। स्टाफ भी पूरा है। कहीं कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पहले दिन सवारियां बहुत कम रहीं। - चीनी प्रसाद, एआरएम (कार्मिक)
बहुत अच्छा तो नहीं, लेकिन फिर भी पहले दिन बसों का संचालन ठीक रहा। पहले बसें लगभग फुल करके ही रवाना की गईं, लेकिन जब सवारियां कम निकलते देखीं और बसों की रवानगी में विलंब होने लगा तो दोपहर से 30-35 सवारियां होने पर ही बसें रवाना की गईं। - दिनेश सिंह भदौरिया, सेटेलाइट बस स्टेशन प्रभारी