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मेरा बेटा तो नहीं रहा... दूसरे बच्चों का तो ख्याल करे पुलिस

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बरेली। नो एंट्री जोन में अवैध खनन के रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर पार्थ की मौत के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है। पिता गोपाल पुलिस की ओर से ठोस कार्रवाई न होने से सबसे ज्यादा आहत हैं। उनका कहना है कि पुलिस वालों को नहीं भूलना चाहिए कि बच्चे उनके भी हैं। उन्हें इंसाफ भले न मिले लेकिन कम से कम इतना तो किया जाए कि किसी और मां-बाप को इकलौते बेटे की मौत का दुख न झेलना पड़े।
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आलमगीरी गंज में रहने वाले सुपारी व्यापारी गोपाल शर्मा के 14 वर्षीय बेटे को रेत भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उस वक्त कुचल दिया था जब वह उसे स्कूटी पर बैठाकर स्कूल छोड़ने जा रहे थे। खुद गोपाल इस हादसे में बाल-बाल बच गए थे। बुरी तरह घायल पार्थ का एम्स दिल्ली में इलाज चल रहा था। एक पैर काटने के साथ 27 ऑपरेशन करने के बावजूद डॉक्टर उसे नहीं बचा सके। सोमवार शाम पार्थ के अंतिम संस्कार के बाद से उसकी मां निशा और बहन वर्तिका बेसुध जैसी हालत में हैं।
अमर उजाला से बातचीत में गोपाल शर्मा ने कहा कि यह उम्मीद नहीं थी कि पुलिस और प्रशासन इस मामले को इतने हल्के ढंग से लेंगे। आखिर पुलिस वालों के भी बच्चे हैं। वह चाहते हैं कि भले पुलिस उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए कार्रवाई न करे लेकिन कम से कम दूसरे बच्चों की जिंदगी का तो ख्याल करे। पुलिस को आरोपी ट्रैक्टर चालक और उसके मालिक के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
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पुलिस ने तहरीर बदलवाकर हटा दिया ड्राइवर का नाम
गोपाल शर्मा ने कोतवाली पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि जब उनके बेटे के कुचले जाने के बाद लोगों ने ट्रैक्टर ड्राइवर को पकड़कर कोतवाली पुलिस के हवाले किया था। आरोपी ड्राइवर का नाम पूछकर उन्होंने पुलिस को नामजद तहरीर दी लेकिन पुलिस ने उनसे तहरीर बदलवा दी और फिर अज्ञात ड्राइवर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। इसके अलावा पुलिस ने ड्राइवर का न एल्कोहल टेस्ट कराया न ही उसके डीएल और ट्रैक्टर की रिपोर्ट आरटीओ से ली। ओवरलोडिंग, बगैर नंबर ट्रैक्टर चलाने के मामले में भी कार्रवाई नहीं की और ड्राइवर को छोड़ दिया।
अफसोस, डिप्टी सीएम ने एक आश्वासन तक नहीं दिया
गोपाल शर्मा ने बताया कि घटना के बाद उनकी डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से बातचीत हुई थी। इसके बाद भी काफी समय तक व्हाट्सएप पर उनसे बातचीत चल रही है, इसके बावजूद पिछले 20 दिनों में उन्होंने उन्हें कोई आश्वासन तक नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पार्थ की मृत्यु के लिए पुलिस-प्रशासन की लापरवाही जिम्मेदार है। शहर में कानून की धज्जियां उड़ाकर रेत भरी ट्रॉलियां दौड़ रही हैं। वह भी तब जब उनके पास खनन करने का लाइसेंस तक नहीं है।
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