Parsakheda project of Housing Development Council
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
आवास विकास परिषद का परसाखेड़ा प्रोजेक्ट भी धड़ाम हो चुका है। सात साल से 50 हजार आवासों की कालोनी बनाने की चल रही योजना ठप होने से सात गांवों के बारह सौ किसानों को झटका लगा है। इन किसानों से प्रचलित मुआवजा की दर से जमीन अधिग्रहण की बात सात साल से चल रही थी। डेढ़ साल से किसानों के जमीन बेचने पर प्रतिबंध था। शासन की टीम कई बार सर्वे कर चुकी थी। मगर, जमीन के रेट ज्यादा होने का बहाना बनाकर आवास विकास ने प्रोजेक्ट से हाथ खड़े दिए हैं।
सात साल पहले आवास विकास परिषद ने ट्यूलिया, धनतिया, हमीरपुर, फरीदापुर रामचरन, मिलक इनायतगंज, बल्लिया और बोहित गांवों की 1290 एकड़ (522) जमीन पर 50 हजार आवासों की कालोनी डेवलप करने की योजना बनाई थी। इसमें 12 सौ से ज्यादा किसानों से सर्किल रेट से दो गुनी कीमत पर जमीन अधिग्रहण की बातचीत लंबे समय से चल रही थी। अधिकांश किसान भी जमीन देने को तैयार थे। आवास विकास परिषद ने डेढ़ साल से किसानों की जमीन के बैनामों पर रोक लगा रखी थी। अब ये योजना फिलहाल ठप हो चुकी है। आवास विकास परिषद का प्रोजेक्ट ठप होने से 12 सौ किसानों को झटका लगा है। ये किसान परिषद से जमीन के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हालांकि आवास विकास इंजीनियरों की मानें तो जमीन का अधिग्रहण न होने से किसानों की ये मांग को पूरा किया जाना संभव नहीं है। अब यहां किसानों की जमीन पर बिल्डरों की नजर है। कुछ बिल्डर सस्ती कीमतों पर किसानों की जमीन खरीदकर कालोनियां डेवलप करने में लगे हैं।
इससे पहले आवास विकास परिषद ने उदयपुर खास और बिहारमान नगला में 1983 में आवासीय कालोनी बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण करने की योजना बनाई थी। तत्कालीन डीएम के सर्किल रेट का मुआवजा तय होने के बाद ये प्रोजेक्ट ड्राप हो गया। किसान मुआवजे की मांग को लेकर हाईकोर्ट चले गए। अब यहां किसानों की जमीन बिल्डरों ने खरीदकर निजी कालोनियां डेवलप कर दीं। आवास विकास परिषद ने योजना-7 में सुरेश शर्मा नगर कालोनी 2007 में बनाई थी। 10 साल से आवास विकास परिषद ने शहर में कोई नई कालोनी नहीं बसाई।
परसाखेड़ा में कालोनी बनाने की योजना रुकी हुई है। जमीन के रेट ज्यादा होने से आवास विकास ने प्रोजेक्ट पर काम आगे नहीं बढ़ाया। किसानों को मुआवजा देने का सवाल ही नहीं क्योंकि उनकी जमीन अधिग्रहण नहीं की गई। सुश्री नेहा, एक्सईएन आवास विकास