बरेली। शहर के पार्कों की तस्वीर संवारने के लिए नगर निगम की तरफ से पिछले साल तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद इनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। वर्तमान में पार्कों के मुख्य गेट पर शहीद के नाम का बोर्ड टूटा है तो कहीं पशु बांधे जा रहे हैं। झाड़-झंखाड़ और गंदगी तो आम बात है। अब पार्कों को बेहतर बनाने के लिए फिर साढ़े सात करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
शहर के 332 पार्कों में से ज्यादातर बदहाल हैं। कई पार्कों से हरियाली गायब हो गई है। उनमें झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। कई पार्कों का इस्तेमाल वाहन पार्किंग के तौर पर हो रहा है। कहीं हैंडपंप सूखे तो कहीं झूले टूटे पड़े हैं। पार्कों के रखरखाव के लिए ब्लैक लिस्टेड कंपनी परमार कंस्ट्रक्शन को कोर्ट के आदेश पर फिर जिम्मेदारी दे दी गई। बजट न मिलने के कारण पार्कों की टूटी दीवारों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। वहां कूड़ा फेंका जा रहा है। इससे वह पार्क की सूरत में नजर नहीं आ रहे हैं।
राजेंद्रनगर में बलिदानी पंकज अरोरा की याद में उनके निवास के सामने बने पार्क के मुख्य गेट पर लगा उनके नाम का बोर्ड टूटा है। इससे पार्क की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। इसके लिए पार्षद की तरफ से दो माह पहले ही नगर निगम को पत्र देकर ठीक कराने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं की गई। शहर में सर्वाधिक 36 पार्क इंद्रानगर में हैं। इसमें कई पार्कों की दीवार गिरी हुई है। कुछ में झाड़-झंखाड़ उगे हुए हैं।