बरेली। कोरोना का खौफ एक बार फिर अभिभावकों पर हावी होने लगा है। सोमवार से पहली से पांचवीं तक के स्कूल खुल तो रहे हैं लेकिन ज्यादातर अभिभावकों अपने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ इनकार कर दिया है। इन अभिभावकों का कहना है कि इस सत्र का एक ही महीना बचा है लिहाजा बच्चों को स्कूल बुलाने के बजाय बाकी पढ़ाई के साथ परीक्षा भी ऑनलाइन कराना बेहतर रहेगा।
जिला अस्पताल के मनकक्ष की काउंसलर खुश अदा के मुताबिक कक्षा छह में पहुंचने वाले बच्चों की उम्र आम तौर पर दस वर्ष से ज्यादा होती है। इस उम्र के बाद बच्चे का सामान्य तौर पर मानसिक विकास हो जाता है। वह अच्छा और बुरा पहचानने में लगभग सक्षम होता है लेकिन फिर भी दोस्तों के साथ घुलने-मिलने के बाद चूक कर सकता है क्योंकि इस उम्र में नई चीजों के जानने की उत्सुकता भी होती है। कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चे दस साल से कम उम्र के होते हैं जिनसे बातों को ठीक से याद रखने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। इसलिए इस उम्र के बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों का चिंतित होना लाजमी है। खासकर तब जब कुछ राज्यों में कोविड संक्रमण बढ़ने लगा है। उन्होंने अभिभावकों को बेहद सोच-समझकर ही छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए कहा है। हालांकि ज्यादातर अभिभावक पहले ही बच्चों को स्कूल भेजने से इनकार कर चुके हैं।
ऑनलाइन सर्वे में 75 फीसदी बोले ‘ना’
अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना ने बताया कि उन्होंने छोटे बच्चों के अभिभावकों की इच्छा जानने के लिए पिछले दिनों सोशल मीडिया के जरिए सर्वे किया। इसमें एक हजार से ज्यादा अभिभावक शामिल हुए जिसमें से 75 फीसदी ने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ इनकार कर दिया। 20 फीसदी में असमंजस में दिखा और पांच फीसदी ने ही बच्चों को स्कूल भेजने की बात कही। इन अभिभावकों का भी यह तर्क था कि फीस देनी पड़ रही है इसलिए वे बच्चों को स्कूल भेजेंगे। अंकुर ने स्कूल प्रबंधकों को गर्मियों बाद स्कूल खोलने का सुझाव दिया है।
छोटे बच्चों को स्कूूल भेजना ठीक नहीं है। मैं अपने बेटे को स्कूल नहीं भेजूंगी। साल भर जब ऑनलाइन क्लास चली है तो परीक्षाएं भी ऑनलाइन ही कराई जानी चाहिए। - तन्वी अग्रवाल, रामपुर बाग
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अभिभावकों का चिंतित होना लाजमी है मगर स्कूल भी बच्चों को सुरक्षित रखने के पूरे प्रयास कर रहे हैं। कोविड प्रोटोकॉल का पालन होगा। घबराने की जरूरत नहीं है। - पारुष अरोरा, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
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अभिभावकों से अनुरोध है कि वह सुरक्षित माहौल देखकर ही बच्चों को स्कूल भेजें। शपथ पत्र भरने के बाद संक्रमित होने पर स्कूल किसी तरह की कोई जिम्मेदारी नहीं लेंगे। - अंकुर सक्सेना, अभिभावक संघ
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छोटे बच्चों को कोरोना के बारे में भले ही जानकारी हो मगर वह स्कूल में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर सकेंगे। अभिभावक सोचसमझकर इस बारे में फैसला करें। - खुश अदा, काउंसलर मनकक्ष
बढ़ती गर्मी भी लेगी बच्चों का इम्तहान
तापमान में बढ़त जारी, एक डिग्री सेल्सियस चढ़ा पारा
बरेली। तेजी से बदल रहा मौसम लोगों क ो तपन का एहसास कराने लगा है। स्कूल जाने वाले बच्चों को गर्मी से भी जूझना पड़ेगा।
अब तक रात के वक्त हल्की ठंड हो रही थी लेकिन अब वह भी खत्म होती नमी के साथ गायब हो रही है। आसमान साफ होने से कोहरे का प्रकोप भी थम चुका है। मौसम विभाग ने हवा की दिशा बदलने तक तापमान में बढ़त जारी रहने के आसार जताए हैं। आंचलिक मौसम अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक रविवार को अधिकतम तापमान स्थिर रहा लेकिन हवा से नमी कम होने की वजह से न्यूनतम तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की बढ़त हुई है। हवा की दिशा पश्चिम उत्तर पश्चिम होने तक मौसम और गर्माहट का एहसास कराएगा। रविवार को अधिकतम 31.6 डिग्री और न्यूनतम 15.5 डिग्री सेल्यिस दर्ज किया गया। ब्यूरो