सोमवार को शाहबाद की गलियां रूहानियत की बारिश से सराबोर थीं। अकीदतमंदों का भारी जमावड़ा दरगाह की गलियों में एकत्र था। हजरत शाह शराफत अली मियां के दीवाने उर्स की खुशियों से लबरेज थे। मौका था परचम-ए-शराफती के जुलूस का। तकरीरी तकरीब के बाद साहिबे सज्जाजा शाह सकलैन मियां हुजूर ने परचम सौंपकर जुलूस रवाना किया। आया.. उर्स शराफत आया.. गली-गली झंडा लहराया... के नारों के बीच जुलूस चल पड़ा और दीवाने झूम कर उर्स-ए-शराफत तथा ईद-मीलादुन्नबी के नारे लगाते हुए बढ़ते रहे।
झिलमिलाती पन्नियों, फूलों की झालरों, झंडे, बैनर और स्वागत द्वारों से सजे रास्तों से जुलूस पूरी शान के साथ गुजरा। जुलूस जिन रास्ते से निकला, अकीदतमंदों ने गुलाब और गेंदों के फूलों की पंखुड़ियों की बारिश कर उन्हें मखमली बना दिया। इत्र और केवड़े की खुशबू माहौल में ताजगी भर रही थी। जुलूस अल्हाज गाजी मियां, अल्हाज मुमताज मियां और अल्हाज मुंतखब मियां की कयादत में निकाला गया। जो हजरत शाह शराफत मियां से चल कर ब्रह्मपुरा, दीवानखाना, कोहाड़ापीर से कुतुबखाना होते हुए मनिहारों की गली के रास्ते दरगाह शरीफ पहुंच कर पूरा हुआ। यहां सज्जादानशीन शाह मोहम्मद सकलैन मियां ने परचम कुशाई की रस्म अदा की। इससे पहले दरगाह मेहमानखाने में महफिल सजाई गई। सज्जादानशीन की सरपरस्ती में हुए इस कार्यक्रम में नातो मनकबत और तकरीरें हुईं। इसके बाद जुलूस रवाना किया गया।