पैरामेडिकल संस्थानों के फर्जीवाड़े सामने आने के बाद अब प्रशासन इनकी जड़े खुदवाने में जुट गया है। हिंदुस्तान पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट ने प्रशासन की जांच में जिस पैरामेडिकल काउंसिल आफ इंडिया अमेठी की संबद्धता का सर्टिफिकेट दिया है वो संदेह के घेरे में हैं, क्योंकि पैरामेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया दिल्ली इसकी डिग्री पर सवाल उठा चुका है, लिहाजा उसकी पड़ताल मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एवं फेमिली वेलफेयर से कराई जाएगी। इसके अलावा स्टेट मेडिकल फैकल्टी और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया दिल्ली से भी सत्यापन कराया जाएगा।
हिंदुस्तान पैरामेडिल इंस्टीट्यूट का फर्जी यूनिवर्सिटी विश्वकर्मा से संबद्धता का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसकी जांच कराई थी। बाद में संस्थान ने पैरामेडिकल काउंसिल अमेठी से संबद्धता दिखाई। हालांकि पैरामेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया दिल्ली ने अमेठी वाली संस्था की वैधता पर सवाल उठाए हैं। वहां के कोआर्डिनेटर का कहना था कि इस संस्था की डिग्री सरकारी नौकरी में वैध नहीं होंगे। प्रदेश में केवल मेडिकल फैकल्टी ही इसके लिए वैध है। जब पैरामेडिकल काउंसिल अमेठी से संपर्क किया गया था उन्होंने खुद को वैध बताते हुए खुद को मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एवं फेमिली वेलफेयर के तहत स्थापित होने की बात कही। इस बात में कितनी सच्चाई इसकी जांच कराई जाएगी। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. आरपी यादव ने बताया कि जो सर्टिफिकेट एचपी इंस्टीट्यूट ने दिए हैं उसकी जांच कराई जाएगी। इसके लिए मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एवं फेमिली वेलफेयर, मेडिकल फैकल्टी और पैरामेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया दिल्ली से संपर्क किया जाएगा।
राइट्स इंस्टीट्यूट को आज तक की मोहलत
राइट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने दस्तावेज जमा करने के लिए शुक्रवार तक की मोहलत दी है। शुक्रवार को अगर दस्तावेज नहीं दिए तो संस्थान के खिलाफ जांच करने से पहले ही कार्रवाई कर दी जाएगी। हालांकि संस्थान संचालक खुद को बचाने में जुटे है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. आरपी यादव ने बताया कि संस्थान को जवाब देने के लिए तीन दिन की मोहलत दी थी। शुक्रवार को वक्त पूरा हो जाएगा। वहीं जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को दिए जवाब में संस्था संचालकों ने कबूला है कि उनको विश्वविद्यालय की हकीकत पता नहीं थी। इसलिए संबद्धता ले ली। इसके अलावा किसी भी छात्र से फीस नहीं ली गई।