रिदम को प्रशिक्षण स्थल तक छोड़ने जाती थीं पूनम
पूनम ने कोच अजय कश्यप से संपर्क किया, उन्होंने रिदम का मार्गदर्शन किया। शुरुआती चार महीनों तक पूनम खुद बेटी को प्रशिक्षण स्थल तक लेकर जातीं और वापस लातीं। यह सफर उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि रोजमर्रा के घरेलू काम, परिवार की जिम्मेदारियां और बेटी के भविष्य को संवारने का प्रयास, इन सबके बीच खुद को मजबूत बनाए रखना उनके लिए किसी जंग से कम नहीं था।
हर प्रतियोगिता में पूनम और उनके पति अब भी बेटी के साथ जाते हैं और रिदम का मनोबल बढ़ाते हैं। पूनम कहती हैं कि अगर माता-पिता अपने बच्चों पर भरोसा रखें और समाज की परवाह किए बिना उन्हें सही दिशा दें, तो कोई भी कमी उनके सपनों के आड़े नहीं आ सकती।