रामनगर में चल रहे तीन दिवसीय पांचाल महोत्सव के दूसरे दिन समरसता यज्ञ, परिक्रमा शोभायात्रा, मातृशक्ति सम्मेलन के कार्यक्रम हुए। इस दौरान वक्ताओं ने इस क्षेत्र की प्राचीन धरोहरों और विरासत के बारे में विस्तार से बताया।
श्री अहिच्छत्र पार्शवनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में चल रहे महोत्सव में प्रात:काल समरसता यज्ञ के बाद परिक्रमा शोभायात्रा निकाली गई, जो मंदिर परिसर से शुरू होकर, राजा द्रुपद के किला, भीम गदा तक पहुंची। रैली में आसपास क्षेत्र के कई लोग ध्वज लेकर जयघोष करते ढोल नगाड़े बजाते हुए हुए शामिल हुए। दोपहर को महोत्सव स्थल पर आयोजित मातृ शक्ति सम्मेलन में मुख्य वक्ता प्रांत प्रचारक धमेंद्र कुमार ने कहा कि यह समूचा क्षेत्र महाभारत काल की धरोहरों को आज भी संजोए हुए है। इसके बाद यहां आए रूहला सरदारों ने इसे रूहेलखंड क्षेत्र बना दिया। उन्होंने नारी शक्ति की भूमिका, संस्कारों के संरक्षण तथा समाज निर्माण में उनके योगदान, सामाजिक एकता, समरसता और राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे गए।
यहां पर क्षेत्र में गोसेवा में समर्पित गो-पालकों को सम्मानित कर उनके सेवा कार्यों की सराहना की गई। रात को कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जहां कवियों ने राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इस दौरान सह प्रांत प्रचारक विनोद, जिला प्रचारक अनुज पार्थ, जिला कार्यवाह अभिमन्यु, पीलीभीत की चेयरमेन डॉ. आस्था अग्रवाल, मीना मौर्य, उषा सतीजा, सपना अग्रवाल, विपिन सिंह, यशवंत सिंह, नरेंद्र राजपूत, आशुतोष अग्रवाल,वेदप्रकाश यादव आदि मौजूद रहे। संवाद