मुखर्जी अस्पताल में मरीज की मौत के बाद चार घंटे हंगामा,सड़क जाम
- दर्द निवारक इंजेक्शन लगाने के पांच मिनट के अंदर जान चली गई
- पुलिस और पीएसी ने संभाले हालात, फिर समझौता हो गया
बरेली। अयूब खां और चौपला चौराहों के बीच मुखर्जी अस्पताल में गुरुवार को एक मरीज की मौत के बाद जमकर बवाल हुआ। करगैना का मकसूद हाथ पर फ्रैक्चर होने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा था। प्लास्टर चढ़ाने के बाद उसे दर्द का इंजेक्शन लगाया गया और पांच मिनट के अंदर उसकी मौत हो गई। ठीक ठाक हालत में इलाज कराने पहुंचे मकसूद की अचानक मौत पर भड़के परिजनों और मुहल्ले वालों ने अस्पताल घेर लिया और हंगामा करने लगे। अस्पताल प्रशासन ने बवाल का अंदेशा देखते हुए पहले ही पुलिस बुला ली थी जिससे लोग अस्पताल में नहीं घुस पाए और सड़क जाम कर दिया। मेयर और आईएमए पदाधिकारियों की मौजूदगी में चार घंटे तक चली लंबी वार्ता के बाद ढाई लाख रुपये मुआवजा देना तय हुआ उसके बाद ही परिजन शव अस्पताल से ले गए।
करगैनी के पुरानी मस्जिद के पास रहने वाले मकसूद अहमद (46) अपने साथी अकबर के साथ गुरुवार को बड़ा बाजार स्थित रंगोली साड़ी के यहां फर्नीचर का काम करने आए थे। यहां काम करते समय अचानक स्टूल से गिर पड़े और हाथ में फ्रैक्चर हो गया। करीब ढाई बजे रंगोली साड़ी के गुंजन उन्हें लेकर मुखर्जी अस्पताल पहुंचे। अकबर ने बताया कि डॉ. एसके मुखर्जी ने प्लास्टर चढ़ाने के बाद उन्हें इंजेक्शन लगाया। मकसूद बेहोश की हालत में लेेटे थे। अकबर ने डॉक्टर से मकसूद को ले जाने को पूछा तो उन्होंने कहा कि होश आने पर ले जाना। इतने में मकसूद को अचानक होश आया तो उन्होंने पानी मांगा। कुछ मिनट बाद मकसूद आंखें खोले लेटे रहे। अकबर ने डॉक्टर को बताया तो उन्होंने कहा कि बेहोशी में है, लेकिन आंख खुले होने की बात कही तो डॉक्टर भी सहम गए। अकबर ने रंगोली साड़ी के गुंजन को भी बुला लिया। अचानक मौत से घबराए अस्पताल प्रशासन ने बवाल के अंदेशा होने पर पहले ही पुलिस को सूचना दी और मेयर डॉ. आईएस तोमर को भी अस्पताल में बुला लिया। चार बजे मौत की पुष्टि डॉक्टरों ने की तो मकसूद के घरवालों में खलबली मच गई। करगैना से मरीज के परिजन भीड़ लेकर अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल में भीड़ जमा हो गई। नारेबाजी और हंगामा होने लगा। पुलिस ने अंदर घुसने नहीं दिया तो भीड़ ने सड़क जाम कर दिया। बाद में आईएमए के पदाधिकारी भी पहुंच गए। चार घंटे तक अस्पताल में समझौता वार्ता होती रही तो बाहर भीड़ हंगामा करती रही। परिजनों ने बताया कि रात आठ बजे ढाई लाख रुपये मुआवजा देने की बात पर समझौता हुआ तो परिजन शव ले गए।
प्लास्टर चढ़ाने के बाद मरीज को दर्द निवारक इंजेक्शन मिडजोलेम लगाया था। वह बाथरूम भी गया लेकिन लड़खड़ा रहा था। अचेतावस्था में था और उसे अटैक पड़ गया-डॉ. एसके मुखर्जी, अस्पताल संचालक