कुर्सी की नौकरी और व्यायाम न करने से युवाआें में कमर के नीचे का दर्द बढ़ता जा रहा है। इससे पीड़ित लोगों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि इसे आम बीमारी समझकर लोग समय से इलाज नहीं कराते। इसका असर उनकी ओवरऑल सेहत पर पड़ता है। शनिवार को एसआरएमएस मेडिकल इंस्टीट्यूट में न्यूरो और हड्डी रोग से जुड़ी कांफ्रेंस में विशेषज्ञाें ने उन बीमारियों पर बात की जो तेजी से बढ़ रही हैं। लाइव सर्जरी कर कुछ नई जानकारियां भी डॉक्टराें से साझा किया।
न्यूरो सर्जरी एवं आर्थोपेडिक विभाग और बरेली न्यूरो एसोसिएशन के सहयोग से स्पाइन पर एक दिवसीय कार्यशाला में मैक्स हास्पिटल देहरादून के डॉ. एके सिंह ने बताया कि आजकल कमर के निचले हिस्से में दर्द एक आम समस्या बन गई है। इसके मरीज रोज बढ़ते जा रहे हैं। मरीज बीमारी बढ़ने के बाद डाक्टरों के पास आ रहे हैं। इसका दवाईयों द्वारा इलाज संभव नहीं हो पाता है। उन्हाेंने बताया कि कुछ मरीज लंबे समय से दर्द निवारक दवाआें का प्रयोग करते हैं जिससे उनकी किडनी फेल होने की संभावना बढ़ जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण दिनचर्या का अस्त-व्यस्त, व्यायाम न करना, कुर्सी पर गलत तरीके से बैठना व अधिक वजन उठाने वाला कार्य लगातार करना प्रमुख है। पीजीआई लखनऊ के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि रीढ़ की हड्डी का मरीज सही समय पर डॉक्टर के पास पहुंचे तो यह पूरी तरह ठीक हो जाए। भ्रांति है कि रीढ़ की हड्डी के आपरेशन से पैरों की क्रियाशीलता कम होती है जो गलत है। इस मौके पर प्रशासनिक निदेशक आदित्य मूर्ति, प्रो. आरसी पुरोहित, डॉ. वीपी पठानिया, आरके बाजपेई, आयोजन सचिव डॉ. शशांक शाह, कुमार आशीष, डॉ. रजनीश मधोक व अन्य शामिल रहे। आदित्य मूर्ति ने बताया कि जल्द ही टेक्निकल रिहैब्लीटेशन सेंटर खुलेगा।