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बिना सत्यापन किसानों से होगी धान की खरीद

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बदायूं। अब किसानों को 100 क्विंटल तक धान बेचने के लिए एसडीएम के सत्यापन की जरूरत नहीं होगी। किसान अब यूं ही क्रय केंद्र पर अपना धान बेच सकता है। हालांकि किसानों द्वारा विभाग की साइट पर कराए गए रजिस्ट्रेशन और खतौनी में मिलान क्रय केंद्र पर तैनात प्रभारियों द्वारा किया जाएगा। नाम में अंतर मिलने पर एसडीएम स्तर से फिर सत्यापन की जरूरत पड़ेगी। हालांकि अब तक सभी को 100 क्विंटल तक एसडीएम से सत्यापन कराना पड़ रहा था। इससे प्रक्रिया से किसानों को काफी राहत मिली है।
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शासन के निर्देशों के बाद में जनपद में एक अक्तूबर से 33 धान क्रय केंद्रों को खोल दिया गया, जिससे यहां पर जनपद के किसान अपनी (उपज) धान को बेच सकें और किसानों को शासन की ओर से घोषित समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके, लेकिन कुछ जनपदों में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसकी वजह यह थी कि अब तक धान बेचने पर किसानों को एसडीएम की सत्यापन रिपोर्ट क्रय केंद्र प्रभारी को देनी पड़ती थी। इसके बाद उनका धान केंद्र पर खरीदा जा रहा था। ऐसे में किसानों को अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे, लेकिन शासन ने इस नीति में बदलाव कर दिया है। अब किसानों को 100 क्विंटल तक धान बेचने के लिए एसडीएम के सत्यापन की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि किसान की तरफ से विभाग की साइट पर कराए गए रजिस्ट्रेशन और खतौनी के नाम में अंतर मिलता है, तो इसकी जांच एसडीएम से कराई जाएगी।
ऑनलाइन टोकन व्यवस्था की बंद
शासन की तरफ से ऑनलाइन टोकन वितरण की प्रक्रिया को भी बंद कर दिया है। विभाग के अनुसार ऑनलाइन टोकन की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इसको लेकर अब नियम में बदलाव कर दिया गया है। इसका फायदा किसानों को मिलेगा। हालांकि ऑफलाइन टोकन जारी करने वाला सिस्टम जारी रहेगा। इसके तहत उन्हीं किसानों को टोकन जारी किया जाएगा, जो किसान वहां पर मौजूद रहेंगे।
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नई नीति से किसानों को फायदा ही होगा, क्योंकि अधिकारियों के बेवजह चक्कर नहीं लगाने होंगे। अब सीधे ही धान की खरीद की जाएगी, किसानों को कहीं पर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
-सुलेमान
जो बदलाव किए हैं, उससे सभी किसानों को राहत मिलेगी। ऑनलाइन टोकन में किसानों को भी दिक्कत आ रही है। ऑफलाइन टोकन सही हैं। कम से कम उन किसानों को टोकन मिलेंगे, जो वहां पर मौजूद है।
ब्रजलाल
शासन की तरफ से नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके तहत ऑन लइन टोकन व्यवस्था को खत्म किया गया है। ऑफलाइन टोकन सिस्टम जारी रहेगा। वहीं कागजों में अगर गड़बड़ी लगती है, तभी किसानों का सत्यापन कराया जाएगा, अन्यथा सीधे किसानों का धान खरीदा जाएगा।
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-प्रकाश नारायण, जिला विपणन अधिकारी
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