बरेली। धान की फसल तैयार होने के बाद उसे बेचने के लिए मंडी पहुंच रहे किसानों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। सेटेलाइट आधारित सर्वे के बाद राजस्व रिकॉर्ड में गलती और खसरा-खतौनी नहीं निकलने के कारण किसानों को धान बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई किसानों के खेतों में खड़ी धान की फसल को रिकॉर्ड में गन्ना दर्ज कर दिया गया है, जबकि कुछ के खेत खाली दिखाए जा रहे हैं। इससे किसानों की फसल की बिक्री प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
रिकॉर्ड की गलती ठीक कराने के लिए किसान लेखपाल से संपर्क कर रहे हैं तो लेखपाल पोर्टल काम न करने की बात कह रहे हैं। इससे उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि रिकॉर्ड कब तक दुरुस्त होगा और उनके धान की बिक्री कब हो सकेगी।
एक हफ्ते से मंडी में पड़ा धान
खितौसा निवासी ठाकुर प्रसाद आनंद ने बताया कि उन्हें 90 से 95 क्विंटल धान बेचना है। खसरा निकलवाने पर उनके रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं दिखा रहा है। पोर्टल खुलने के दौरान स्क्रीन खाली दिख रही है। एक हफ्ते से धान डेलापीर मंडी में पड़ा हुआ है।
खुले बाजार में मिल रहा कम मूल्य
सुरला गांव के रहने वाले हीरालाल ने बताया कि 10 बीघा धान कटवा दिया है। खसरा और खतौनी निकलवाने के दौरान नाम में गड़बड़ी दिखा रही है। नाम ठीक करने के लिए लेखपाल से बात की, तो उन्होंने कहा कि पोर्टल काम नहीं कर रहा है। इस वजह से खुले बाजार में धान बेचना पड़ रहा है। कीमत भी कम मिल रही है।
नहीं निकल रहा खसरा
गोपालपुर गांव निवासी सूरज पाल ने बताया कि उन्होंने 20 बीघा में धान रोपा था। फसल कटने के बाद भी जरूरी कागजात पूरे न हो पाने के चलते अब तक बिक्री नहीं हो पाई है। पोर्टल न चलने से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वर्जन :
कुछ किसानों के साथ इस तरह की परेशानी आ रही है। जो किसान पंजीकरण करवा रहे हैं, उनके साथ समस्याएं अधिक हैं। इसे ठीक करने के लिए टीम लगी हुई है। उच्च स्तरीय बैठक में भी इस बात पर चर्चा हुई है। जल्दी ही दिक्कतों को दुरुस्त कर दिया जाएगा। - राजेश उपाध्याय, आरएमओ