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खत्म हो चुका है पांच छोटी नहरों का अस्तित्व

Sun, 24 Jan 2016 01:12 AM IST
बरेली
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जो नहरें कभी खेतों की सिंचाई के लिए बनाई गई थीं, उन्हें भू-माफिया की नजर लग गई है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अवैध कब्जों के चलते रुहेलखंड डिवीजन की जद में आने वाली नहरें धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं। 50 से ज्यादा जगहों पर नहरों की जमीन पर अवैध कब्जे हो चुके हैं। 22 कब्जेदारों पर पीपी एक्ट के मुकदमे चल रहे हैं। इनमें अधिकतर बरेली के हैं। ठोस पैरवी न होने के चलते इन पर 20 साल में निर्णय नहीं हो पाया।   
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नहर विभाग के रुहेलखंड डिवीजन में तीन सब डिवीजन आते हैं। तीनों डिवीजन में  12 सौ किलोमीटर एरिया में नहरें हैं। इन नहरों से चार हजार हेक्टेअर से ज्यादा जमीन की सिंचाई होती है। बरेली में रसूला, रहपुरा, टाह, भूड़ा, भोजीपुरा, रिछा, बहेड़ी उत्तराखंड में खटीमा, सितारगंज, उधम सिंह नगर (रुद्रपुर), बनबसा में बड़ी नहरों से निकले 50 से ज्यादा रजवाह (खेतों की सिंचाई के लिए बनाई जाने वाली छोटी नहरें) लुप्त हो चुके हैं। नहर की जमीनों पर माफिया अवैध कब्जे कर रहे हैं। बरेली में सीबीगंज और परसाखेड़ा में दो नहरों का अस्तित्व भी खत्म होने के कगार पर है। मिनी बाईपास पर देवरनियां नदी (जिसे किला नदी भी कहा जाता है) के निकट छोटी नहर थी। नर्सरी रोड पर ये नहर अपना अस्तित्व खो चुकी है। पीलीभीत बाईपास पर आधा दर्जन कालोनियों ने बरेली और भोजीपुरा रहवाह नहरों को निगल लिया। नहर की जमीन पर बिल्डर बीडीए से बिना मानचित्र स्वीकृत कराए धड़ाधड़ अवैध निर्माण करा रहे हैं। नहर विभाग लुप्त होती नहरों को बचाने के लिए अपने स्तर से कोई प्रयास नहीं कर रहा।  

‘ हम बनबसा में कब्जा हटाने गए तो कब्जेदारों ने पुलिस के सामने हमारी जेसीबी तोड़ डाली। इनके खिलाफ मुकदमा तक पंजीकृत नहीं हो पाया। यही हाल बरेली में है। अपने स्तर से जितना हो सकता है, वह करते हैं।’
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 आदेश कुमार, उपखंड अधिकारी नहर विभाग
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