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Bareilly News: मानकों को ठेंगा दिखा रहे 400 से ज्यादा अवैध जिम

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बरेली कोतवाली क्षेत्र में स्थित अल्टीमेट फिटनेस जिम में महिला डॉक्टर के साथ हुई दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग की वारदात ने शहर के फिटनेस सेंटरों के काले सच को बेनकाब कर दिया है। यह घटना अवैध जिम संचालकों की मनमानी और प्रशासनिक लापरवाही का भी प्रमाण है। स्थिति यह है कि शहर के गली-मोहल्लों में संचालित हो रहे 400 से ज्यादा अवैध जिम जनता की सेहत सुधारने के नाम पर उनकी सुरक्षा और भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि सरकारी फाइलों में इनकी मौजूदगी शून्य है। क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी चंचल मिश्रा ने बताया कि जिले के एक भी जिम संचालक ने अब तक पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। यह सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की सक्रियता पर सवाल उठाता है। नियमानुसार, किसी भी जिम के संचालन के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड का प्रमाणपत्र, लीज डीड, बिजली बिल और अग्निशमन विभाग की एनओसी जैसे कड़े मानक अनिवार्य हैं, लेकिन धरातल पर इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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सरकारी गाइडलाइन में स्पष्ट है कि जिम परिसर के भीतर ऑक्सीजन सिलिंडर, स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान जैसे आपातकालीन इंतजाम होने चाहिए। साथ ही, सीसी कैमरों की अनिवार्यता और फ्लोरिंग के विशेष मानकों का पालन भी कागजों तक ही सीमित है। अधिकतर केंद्रों पर न तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं, न ही किसी अप्रिय घटना के लिए संचालकों की कोई जवाबदेही तय है।
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सप्लीमेंट के नाम पर भी चल रहा खेल
अवैध जिम में चल रहा सप्लीमेंट का काला कारोबार युवाओं के लिए धीमा जहर साबित हो रहा है। नियमों के तह,त जिम में किसी प्रकार के प्रोटीन या दवाओं की बिक्री प्रतिबंधित है, फिर भी अनुभवहीन कोचों के माध्यम से युवाओं को भारी मात्रा में प्रतिबंधित सप्लीमेंट बेचे जा रहे हैं। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग निपुण प्रशिक्षकों की नियुक्ति का नियम भी दरकिनार कर दिया गया है। हर साल फरवरी में होने वाले अनिवार्य नवीनीकरण को ठेंगा दिखाकर ये संचालक न केवल सरकारी राजस्व को चपत लगा रहे हैं, बल्कि शहर की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन गए हैं।
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