पूरनपुर(पीलीभीत)। नागरिकता संशोधन बिल कानून बनने के बाद तराई में वर्षों से रहने वाले शरणार्थियों को नागरिकता दिलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों की चिह्नित करने के निर्देश है। शरणार्थियों का डाटा एकत्र किया जा रहा है। अफसर शरणार्थियों को ढूंढ रहे है और शरणार्थी अपने प्रमाण पत्र।
पीलीभीत के माधोटांडा, न्यूरिया, हजारा, कलीनगर और गजरौला में बांग्लादेशी शरणार्थी लंबे अरसे से रह रहे है। इनकी संख्या पचास हजार से अधिक मानी जा रही है। शरणार्थियों में 90 फीसदी गैर मुस्लिम, जबकि बाकी मुस्लिम हैं। 2014 से पहले से रह रहे शरणार्थियों को नागरिकता देने को पात्र माना जा रहा है। पूरनपुर एसडीएम चंद्रभानु सिंह ने बताया कि 15 साल से रहने वाले शरणार्थी कम से कम पांच साल भारत में लगातार रहे हों। इनकी सूची बनाई जा रही है। इसके अलावा अगर कोई शरणार्थी कई साल पहले आया है और उसका परिवार बड़ा होता चला गया, लेकिन परिवार के सदस्यों के पास नागरिकता नहीं है, तो उन्हें भी नागरिकता दी जाएगी। भले ही इन्होंने नागरिकता को आवेदन न किया हो। उनको भी नए सिरे से नागरिकता दी जानी है। पूरा डाटा बुधवार तक तैयार कर लिया जाएगा।
समुदाय विशेष में है हड़कंप
पूरनपुर। नागरिकता संशोधन कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों की चिह्नित किया जा रहा है। ताकि उनको नागरिकता दिलवाई जा सके। कानून को लेकर एक समुदाय के लोगों में हड़कंप है।
हमारा परिवार वर्ष 1971 में शरणार्थी के रूप में भारत आया था। शरणार्थी की स्लिप हमारे पास है। वर्षों से नागरिकता के लिए इंतजार कर रहे थे। नागरिकता मिलने पर आय, जाति प्रमाण पत्र बन सकेंगे। मतदाता सूची में भी हमारा परिवार का नाम शामिल होगा। इससे हम लोगों को भी नेता चुनने का मौका मिलेगा। -दिलीप सरकार, चंदिया हजारा।
भाजपा सरकार से ही उम्मीद थी कि सरकार बनने पर नागरिकता का अधिकार भी मिल जाएगा। भाजपा उस उम्मीद पर खरी उतरी है। जमीन का हक भी अब मिल जाएगा। - सुबोध बाला।
सालों से नागरिकता मिलने की उम्मीद लगाए थे। नागरिकता के साथ नमोशूद्र को अनुसूचित जाति का दर्जा और मिल जाए। तब और अच्छा रहेगा। नागरिकता मिलने से नौकरी मिलना भी आसान होगी। -दिलीप बैरागी।
शरणार्थियों को जो भूमि दी गई थी। उसे आज तक उनके नाम नहीं किया गया। भूमि पर परिवार के मुखिया की मौत के बाद विरासत नहीं की गई। धर्म को आधार बनाकर नागरिकता संशोधन कानून बनाया गया, जो गलत है। - देवाशीष राय।