पूरनपुर (पीलीभीत)। लखनऊ में हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी हत्याकांड से जुड़े नागपुर के आसिफ के मोबाइल से आई रॉन्ग कॉल के चक्कर में फिरोज फंस गया। एटीएस ने उसे दो बार हिरासत में लेकर लगभग 50 घंटे तक पूछताछ की। पीलीभीत, बरेली के अलावा लखनऊ के एटीएस मुख्यालय ले जाकर पूछताछ की गई। लेकिन जरा भी संलिप्त न पाए जाने पर मंगलवार की रात छोड़ दिया गया।
कमलेश तिवारी हत्याकांड से तार जुड़े होने के शक पर एटीएस ने शेरपुरकलां निवासी फिरोज को बीस अगस्त की रात करीब दस बजे घर से उठा लिया था। पीलीभीत के एक होटल में रात को उससे पूछताछ की गई। उसे छोड़ा जाता कि इससे पहले डीआईजी ने फोन कर उसे बरेली बुला लिया गया। फिरोज के अनुसार बरेली में पूछताछ के बाद उसे क्लीन चिट मिल गई थी। लेकिन वह घर पहुंच भी न पाया था कि उसे फिर हिरासत में ले लिया गया। एटीएस अफसर ने बताया कि जिसका फोन उसके पास आया था। वह एटीएस मुख्यालय लखनऊ में है। अब उसका आमना-सामना कराया जाएगा। फिर उसे लखनऊ के एटीएस मुख्यालय ले जाया गया, जहां पहले से मौजूद नागपुर के आसिफ से उसका आमना-सामना कराया गया। तब उसने भी धोखे से उसके मोबाइल पर कॉल लगना बताया। जांच में निर्दोष मिलने पर एटीएस के उच्च अफसरों पर एटीएस के अफसर उसे बरेली तक छोड़ने को रवाना हुए। रास्ते में उसने मोबाइल पर अपने परिवार वालों को घर आने की जानकारी देकर शाहजहांपुर में बुलाया। एटीएस ने शाहजहांपुर में उसके पिता को उसे सौंप दिया। फिरोज ने बताया कि उससे हुई पूछताछ आदि की भनक पुलिस अफसरों तक को नहीं होने दी गई। उसने कहा कि अगर वह दोषी होता तो उसे कोई नहीं बचा पाता।
फिरोज बोला..अभद्र व्यवहार नहीं हुआ, छोड़ते वक्त दी हिदायत
फिरोज ने बताया कि एटीएस अफसरों ने पुलिस से तो दूरी बनाए रखी। साथ ही उसे भी मीडिया से दूर रहने की सलाह दी है। एटीएस अफसरों का कहना था कि अगर मीडिया मेें कुछ गलत उछल गया, तब भी तुम झंझट में फंस जाओगे। यही नहीं पूछताछ के दौरान एटीएम अफसरों ने उसे काई परेशानी नहीं होने दी। होटल में अपने साथ ही सुलाया। अपने साथ बैठाकर खाना खिलाया। उनका व्यवहार भी मधुर था। मात्र मोबाइल को कब्जे में लेकर देखा। इसके अलावा उसके पर्स में रखे कागज आदि तक की जानकारी भी नहीं की।