पीलीभीत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के जनपद में 36 हजार लाभार्थी गुम हो गए। स्वास्थ्य विभाग की टीमों के निरीक्षण के दौरान आयुष्मान योजना के लाभार्थी निर्धारित पते पर नहीं मिल रहे हैं। अब उनको जमीन निगल गई या फिर आसमान। इतनी बड़ी संख्या में आयुष्मान योजना के लाभार्थी लापता होने से महकमे में हड़कंप मच गया है। फिलहाल टीमें इन लाभार्थियों की तलाश में जुटी हैं।
केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना एक अप्रैल 2018 से प्रारंभ की थी। मगर, पीलीभीत में करीब एक साल पहले आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई। इस योजना में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को पांच लाख तक का मुफ्त इलाज चयनित प्राइवेट अस्पतालों में कराने का प्रावधान है। शासन द्वारा 1.73 लाख परिवारों का लक्ष्य दिया गया था। इसके तहत 1.19 लाख लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाए चुके हैं। शेष वंचितों के गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। अब तक 4300 लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड का लाभ भी मिल चुका है। इधर जब 1.73 लाख परिवारों में सभी के गोल्डन कार्ड बनाने की बारी आई तो इनमें 36 हजार लाभार्थियों का कुछ पता नहीं चला। विभाग द्वारा किए गए सर्वे के बाद से वे लापता हैं। आयुष्मान भारत योजना में चयनित 36 हजार लाभार्थी निर्धारित पते पर नहीं रह रहे हैं। इससे विभाग उनके गोल्डन कार्ड नहीं बना पा रहा है।
13 अस्पताल चयनित हैं योजना में
आयुष्मान भारत योजना में कुल 13 अस्पताल चयनित हैं। इनमें आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। पांच प्राइवेट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को पांच लाख रुपये तक का इलाज कराने की सुविधा है। हालांकि प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के कार्ड धारकों का इलाज करने में कभी-कभी आनाकानी भी करते हैं। हालांकि यहां ऐसी भी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसमें मरीज कार्ड लेकर भटकता रहा। अस्पतालों ने उसका इलाज नहीं किया। अस्पताल संचालक मरीज के तीमारदार से नगद पैसे मांग रहे थे। मरीज के पास नगद पैसे नहीं थे। ब्रेन हेमरेज की वजह से मरीज की हालत बिगड़ने लगी तो उसके तीमारदार डीएम से मिले। डीएम ने मरीज को बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के निर्देश दिए।
विभाग दोबारा सर्वे में जुटा, 15 फरवरी को शासन को भेजेंगे रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग इन गुम हुए 36 हजार लाभार्थियों को ढूंढने के लिए दोबारा सर्वे करा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक डॉ. अटलमणि शुक्ला के मुताबिक 36 हजार लाभार्थियों को ढूंढने के लिए री-सर्वे चल रहा है। कुछ परिवार मिल भी चुके हैं। यह री-सर्वे शासन से प्राप्त एक निर्धारित प्रारूप पर आशाओं द्वारा किया जा रहा है।
1.73 लाख लाभार्थियों में 36 हजार लाभार्थी नहीं मिल रहे हैं। विभाग द्वारा री-सर्वे कराया जा रहा है। ताकि उन्हें खोजकर उनके गोल्डन कार्ड भी बनाए जा सके। इसकी रिपोर्ट 15 फरवरी तक शासन को जानी है। -डॉ. अटलमणि शुक्ला, जिला समन्वयक, आयुष्मान भारत योजना