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नेताओं-बिचौलियों ने सरकारी धान खरीद में लगाया किसानों को करोड़ों का चूना

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पीलीभीत। किसानों के पास धान अब न के बराबर बचा है। मगर, सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद ने शेयर बाजार की तरह अचानक उछाल मारा है क्योंकि क्रय केंद्रों पर जो धान बिक रहा है, उसमें अधिकांश दलाल और बिचौलियों का है। ये दलाल और बिचौलिए सरकारी सिस्टम से सांठगांठ कर किसानों से जो धान औने-पौने में खरीद चुके हैं, वही दूसरे किसानों के नाम से धान सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण में बिचौलियों ने सीजन में तय सरकारी रेट 1835 रुपये प्रति क्विंटल से 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट में धान खरीदकर किसानों को करोड़ों का चूना लगाया है। किसान साल भर धान की फसल उगाने में मेहनत करने के बाद लुट पिट गया, जबकि असली मुनाफा सरकारी सिस्टम की सांठगांठ से दलाल और माफिया कमा ले गए।
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वर्ष 2019-20 में पीलीभीत जिले का सरकारी धान खरीद का लक्ष्य 3.08 लाख मीट्रिक टन था। एक अक्टूबर से धान खरीद शुरू हुई। धान खरीद शुरू होने से पहले बिचौलिया मुक्त धान खरीद के तमाम दावे किए गए। मगर, किसानों का पंजीकरण होने के समय ही इसमें खेल हो गया। दलाल, बिचौलियों ने राइस मिलर्स से मिलकर बटाईदार किसानों के नाम पर सरकारी वेबसाइट पर अपने पंजीकरण करा लिए। सरकारी आंकड़ों को देखें तो पूरे जनपद में 32400 किसानों से अब तक 2.63 लाख मीट्रिक धान की खरीद हो चुकी है। इनमें सर्वाधिक 10086 किसान पूरनपुर के हैं। वहीं 1893 बटाईदार किसान हैं। बटाईदार किसानों के गाटा संख्याओं में ही खेल किया गया। दलाल और बिचौलियों की आड़ में राइस मिलर्स ने तय रेट से 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट पर किसानों से धान खरीदा। वही अधिकांश धान बटाईदार किसानों के नाम पर अब बेचा जा रहा है। सरकारी धान खरीद में करोड़ों की हेराफेरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आंकड़ों में 14297 हेक्टेयर पंजीकृत खातों को फर्जी पाया गया। इसकी तुलना में केवल 6248 गाटा निरस्त किए गए। मतलब, किसानों के नाम पर फर्जी पंजीकरण कराकर करोड़ों की धान खरीद हो गई। किसान पूरे साल मेहनत करने के बाद फिर सरकारी सिस्टम और बिचौलियों की सांठगांठ से ठगी का शिकार होकर रह गया।
न छापा मारा, न ही चिट्ठी लिखी
जहां तक जनप्रतिनिधियों का सवाल है तो सरकारी दफ्तर में जरा सा उनका काम रुक जाए तो वह उनमें सीधे पहुंचकर छापा मारते हैं। ऐसा दर्शाते हैं कि वह भ्रष्टाचार रोकने के लिए कितने संजीदा हैं, मगर हकीकत इसके उलट है। धान खरीद में फर्जी पंजीकरण से लेकर बिक्री तक में करोड़ों की धांधली हो गई, लेकिन किसी भी माननीय ने सरकारी क्रय केंद्रों पर न तो छापा मारा, न ही कभी यह जानने की जरूरत समझी कि किसान को उनकी उपज का मूल्य मिल रहा है या नहीं। एक किसान नेता का कहना है कि क्रय केंद्रों और मंडियों में धान खरीद में लगे दलाल और बिचौलिए भी कहीं बाहर के नहीं थे। क्रय एजेंसियों ने जब सेंटर तय किए थे, तब उनको नेताओं ने ही औने-पौने में धान खरीद के लिए लगाया था।
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क्रय केंद्रों पर धान आ रहा है। उसे खरीदा जा रहा है। ये धान कहां से आ रहा, यह तो नहीं बता सके, लेकिन उसे किसान ही ला रहे हैं। -डॉ. अविनाश चंद्र झा, डिप्टी आरएमओ
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