पीलीभीत। ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए रखवाए गए कूड़ेदानों की खरीद में करोड़ो रूपये के घोटाले में 40 ग्राम पंचायत सचिवों ने नोटिस जारी किए गए हैं। डीएम ने डीपीआरओ के माध्यम से इन सभी का जवाब तलब कराया है। इससे पहले ब्लॉक स्तरीय कमेटियां जांच में 164 प्रधानों की भूमिका संदिग्ध पा चुकी है।
केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन अभियान में गांव-गांव कूड़ेदान रखवाए गए थे। ये कूड़ेदान ड्रम काटकर कम दामों में बनवाए लिए गए, इससे प्रति कूड़ेदान की लागत लागत एक हजार रुपये से भी कम आई। इसके बावजूद 7000 रुपये प्रति कूड़ादान कीमत दिखाकर ग्राम पंचायत निधि से भुगतान ले लिया गया। शिकायतें शासन तक पहुंचीं तो डीएम ने जांच के लिए टीम गठित की थी। तीन सदस्यीय टीम की जांच में गांवों में रखे कूड़ेदान ड्रम काटकर बनवाया जाना पाया गया। जांच कमेटी ने भी पाया कि प्रति कूड़ेदान की कीमत एक हजार रुपये भी नहीं थी, लेकिन खरीद 7000 रुपये दर्शायी गई।
बाद में ये कूड़ेदान कुछ ही दिन में बेकार होने लगे तो खलबली मच गई। लंबे समय तक मामला सुर्खियों में रहने के बाद डीएम वैभव श्रीवास्तव ने ब्लॉक स्तरीय कमेटियां गठित कर जांच कराई। कमेटियों ने जांच रिपोर्ट में प्रधानों को कटघरे में खड़ा करते हुए 164 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को नोटिस जारी दिए थे। वहीं सचिवों की स्थिति भी गड़बड़ देखते हुए अब डीएम के आदेश पर 40 सचिवों को नोटिस जारी किए गए है। जवाब मिलने के बाद प्रधान और सचिवों पर कार्रवाई की जाएगी।
जांच में गड़बड़ी मिलने पर 164 ग्राम प्रधानों को नोटिस भेजे गए थे। बुधवार को डीएम के आदेश पर 40 पंचायत सचिवों को भी नोटिस जारी किए गए है। जवाब मिलने के बाद उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - प्रमोद कुमार यादव, डीपीआरओ