माधोटांडा(पीलीभीत)। शारदा नदी के पार नेपाल की ओर से आए पांच हाथियों ने धान की फसल उजाड़ दी। यह हाथी कब और किसके खेत में घुसकर धान या गन्ने की फसल उजाड़ दें, कुछ कहा नहीं जा सकता। हाथियों के पीलीभीत की सीमा में प्रवेेश करते ही ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई है।
गुरुवार रात लग्गा-भग्गा के जंगल से बाहर निकले पांच हाथी ढकिया ताल्लुके महाराजपुर गांव के पास पहुंच गए। यहां हाथियों ने कई किसानों की एक एकड़ से ज्यादा धान की फसल उजाड़ दी। हाथियों की बढ़ती सक्रियता से किसान परेशान है। टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के जंगल की सीमा नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी के जंगल से मिली हुई है। खुली सीमा होने से हाथी, बाघ और तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों खुले रूप से विचरण करते हैं। इधर, शारदा नदी के पार का इलाका दशकों से हाथियों का कॉरिडोर माना जाता है, लेकिन कुछ सालों से जंगल की जमीन पर कब्जा करके उसे खेती में तब्दील कर दिया गया। इसके चलते नेपाल की ओर से आने वाले हाथियों की चहलकदमी के लिए मात्र लग्गा भग्गा का जंगल की सुरक्षित बचा है। यही वजह है कि हाथी जंगल से बाहर निकलकर ढकिया ताल्लुके महाराजपुर गांव के आसपास चहलकदमी कर ग्रामीणों की फसलों को उजाड़ रहे है। गुरुवार रात नेपाल से पांच हाथी लग्गा भग्गा के जंगल में पहुंच गए। आधी रात के बाद हाथियों ने आबादी क्षेत्र की ओर रुख कर दिया और ढ़किया गांव की सीमा में पहुंचकर फिरुआ राना, पंकज राना, परमल ढाली समेत आधा दर्जन ग्रामीणों की धान की करीब एक एकड़ फसल को पैरों से रौंद दिया। हाथियों के आने की भनक लगते ही ग्रामीणों ने शोर-शराबा शुरू किया। इसके बाद हाथी जंगल की ओर निकल गए। ग्रामीणों ने वन विभाग के लग्गा बग्गा वन चौकी पर सूचना दी। इसके बाद वनकर्मियों ने मौका मुआयना किया। वन विभाग की टीम हाथियों की निगरानी में जुट गई दी है।
धान की फसल पकते ही बढ़ने लगी हाथियों की संख्या
शारदा नदी के पार वैसे तो कई दिनों से नेपाल से आए दो हाथी उत्पात मचाए थे। किसानों की फसलें उजाड़ने के साथ कुछ ग्रामीणों की झोपड़ी भी उजाड़ दी थी। सप्ताह भर से हाथियों की चहलकदमी कम हो गई थी, लेकिन हाथियों की संख्या बढ़ने की ग्रामीण आशंका जता रहे थे। ऐसा ही हुआ गुरुवार रात दो से बढ़कर पांच की संख्या में पहुंचे हाथियों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया है।
जलस्तर कम होने से हाथियों की बढ़ानी होगी निगरानी
शारदा नदी का जलस्तर इन दिनों कम हो गया है। वहीं नेपाल की ओर से आने वाले हाथियों में दो काफी उत्पाती है। आशंका जताई जा रही है कि यह वही हाथी है जो बरेली व रामपुर की सीमा तक आतंक फैला चुके हैं। रात में फसलें उजाड़ने के बाद हाथी शारदा नदी के नजदीक आकर आराम करते हैं। ऐसे में शारदा नदी का जलस्तर कम होने से हाथियों के नदी के इस पार आने का खतरा भी बढ़ गया है। इसकी रोकथाम के लिए विभाग की ओर से हाथियों की निगरानी को बढ़ाना जरूरी होगा।
शारदा नदी के पार हाथियों की चहलकदमी पर पूरी नजर रखने के क्षेत्रीय वनकर्मियों को निर्देश दिए गए हैं। लग्गा भग्गा के अलावा नौजल्हा वन चौकी के वनकर्मी भी निगरानी कर रहे हैं। नियमानुसार हाथियों को खदेड़ने का प्रयास किए जाएंगे। - डीके गोयल, रेंजर बराही