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नवादा बथुआ में दूसरे दिन भी पसरा रहा सन्नाटा, नहीं पहुंचा कोई अधिकारी

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नवाबगंज। नवादा बथुआ गांव में दूसरे दिन भी सन्नाटा छाया रहा। अनुसूचित जनजाति के बचे कुछ परिवार की महिलाएं और बच्चे अपने परिजन के घर लौटने का इंतजार करते रहे। हालांकि पुलिस ने अब गांव छोड़कर भाग 500 लोगों की घर वापसी के लिए कोई उपाय नहीं किया है। पुलिस मोहर्रम में व्यस्त होने की बात कहकर त्योहार निपटने के बाद कार्रवाई करने की बात कह रही है। वहीं दूसरे पक्ष के ग्रामीणों ने विधायक से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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शुक्रवार रात नवादा बथुआ गांव के कल्लू का आठ वर्षीय बेटा अजय दुकान पर सामान लेने जा रहा था। इसी बीच गांव का रिकूं बाबू ने बाइक से उसे टक्कर मार दी, जिससे वह घायल हो गया था। शोर शराबा होने पर दोनों पक्ष के लोग इकट्ठा हो गए थे। कहासुनी के बाद दोनों पक्ष में जमकर मारपीट हुई थी, जिसमें दोनों ओर से छह लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने दोनों पक्ष की ओर से 12 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की थी। शनिवार को रिंकू पक्ष के लोगों ने हथियारों से लैस होकर अनुसूचित जनजाति के लोगों की बस्ती में धावा बोल दिया था। जनजाति के लोगों के साथ जमकर मारपीट की और घरों का सारा सामान तहस-नहस कर दिया। बस्ती की बिजली काटकर मीटर उखाड़ कर फेंक दिए। इसके बाद गांव में दबिश देने पहुंची पुलिस ने भी उनके साथ बदसलूकी की, इससे दहशत में आए अनुसूचित जनजाति के करीब 500 लोग रविवार को दिन निकलने से पहले गांव छोड़कर चले गए। गांव में कुछ एक घरों में ही बच्चे, बुजुर्ग और मरीज बचे हैं। सोमवार को पुलिस को कोई अधिकारी उनकी सुध लेने गांव नहीं पहुंचा। बताते हैं कि घटना के बाद ही कुछ लोगों ने सीओ को फोन किया था और मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने गांव छोड़ने में ही भलाई समझी।
सूत्रों की माने तो नवादा गांव का दूसरा पक्ष सोमवार को विधायक केसर सिंह गंगवार से मिलने पहुंचा और उनसे निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने विधायक को बताया कि अनुसूचित जनजाति के लोग शराब पीकर आए दिन झगड़ा फसाद करते है, जब वे लोग उनका विरोध करते हैं तो मारपीट करते और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देते हैं।
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