दो साल पहले 15-16 जून को आई उत्तराखंड आपदा में बरेली का अरुण कुमार सक्सेना के बारे में प्रदेश सरकार अब दो साल बाद जांच करा रही है। इस बारे में सात मई को मिले शासन के पत्र के अनुसार डीएम ने तहसीलदार सदर से रिपोर्ट मांगी है।
आपदा में लापता अरुण की मां का कहना है कि बेटेे का पता लगाने के लिए वह दो साल से दर -दर की ठोकर खा रही है। केदारनाथ आपदा के कुछ ही दिन बाद उन्होंने देहरादून नियंत्रण कक्ष को सूचना दी थी, उसके बाद 27 अगस्त 2013 को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार में गुहार लगाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसकी उन्होंने मानावाधिकार आयोग में शिकायत की। मानवाधिकार आयोग ने जब प्रदेश सरकार से इस बारे में पूछा तो प्रदेश सरकार ने डीएम से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।
अरुण हरिद्वार में राज कुमार हलवाई की दुकान पर काम करता था। वह आपदा से पहले अपनी दुकान के मालिक राजकुमार के साथ मिठाई बेचने केदारनाथ धाम गया था, यह बात परिजनों को तब पता नहीं थी लेकिन जब काफी समय बाद परिजनों से उसकी फोन पर बात नहीं हुई तो परिजनों से खोज खबर ली। उन्हें जब हरिद्वार से पता लगा कि वह केदारनाथ गया था तो उसके आपदा में लापता होने का अनुमान लगाया गया । उसेक बाद विनोद कुमारी ने इस बारे में पत्राचार शुरू किया।
मानवाधिकार आयोग ने स्थिति स्पष्ट करने को कहा तो शासन बरेली के डीएम को पिछले महीने पत्र लिखा कि अगर अरुण वास्तव में उत्तराखंड आपदा में लापता हुआ है तो उसको मुआवजा की संस्तुति की जाए। फिलहाल डीएम इस मामले की जांच करा रहे हैं। अगर जांच में विनोद कुमारी के दावे की पुष्टि होती है तो उत्तराखंड आपदा में बरेली से लापता होने वालों की संख्या 11 से बढ़कर 12 हो जाएगी।
बता दें कि यहां के सहायक निर्वाचन अधिकारी डॉ. अजय शुक्ला, उनके माता-पिता, सास, पत्नी और दो बच्चों के अलावा शास्त्रीनगर के मनीष कुमार सक्सेना, उनकी पत्नी निधि और बेटा अमन सक्सेना तथा प्रेमनगर के योगेंद्र कुमार कंचन लापता हो गए थे।
‘तहसीलदार से जांच कराई जा रही है, जांच के दौरान उत्तराखंड में अरुण के लापता होने की पुष्टि हुई तो शासन को संस्तुति कर दी जाएगी’ मनोज कुमार, एडीएम (फाइनेंस)