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योगा नहीं पढ़ना चाहते विद्यार्थी

Tue, 09 Jun 2015 01:43 AM IST
बरेली
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21 जून को भले ही विश्व योग दिवस मनाया जा रहा है लेकिन योग की पढ़ाई को लेकर छात्र-छात्राओं में कोई रुचि नहीं है। यही वजह है कि एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से संचालित एक वर्षीय डिप्लोमा योगा और प्राकृतिक चिकित्सा में प्रवेश नहीं होते। इसके चलते यूनिवर्सिटी कैंपस और बरेली कॉलेज समेत कई कॉलेजों में यह कोर्स बंद हो चुका है, शहर में सिर्फ साहू रामस्वरूप महिला महाविद्यालय में यह कोर्स संचालित भी है लेकिन आधी भी सीटें नहीं भर पाती हैं। प्राचार्य डा. शशिबाला राठी बताती हैं कि 30 सीटों में से सिर्फ 16-17 सीटों पर ही प्रवेश हो पाते हैं। उसके लिए भी छात्राओं को काफी प्रेरित करना पड़ता है।
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यूनिवर्सिटी यह व्यवसायिक कोर्स सेल्फ फाइनेंस के तहत संचालित करती है, और योग प्रशिक्षक बनने के लिए इसका महत्व है। फीस पांच हजार रुपये है, इसके बावजूद इसे करने को लेकर विद्यार्थियों में कोई क्रेज न होना दर्शाता है कि योग में ही उनकी रुचि नहीं है। यूनिवर्सिटी ने छह-सात साल पहले जब यह कोर्स शुरू किया था, तब कई कॉलेजों ने इसे संचालित करने की अनुमति ली थी। इनमें बरेली कॉलेज भी एक था लेकिन हर साल काफी सीटें खाली रह जाने की वजह से वर्ष 2012 में कॉलेज ने यह कोर्स बंद कर दिया। यही स्थिति यूनिवर्सिटी कैंपस में रही। यहां भी प्रवेश लेने को विद्यार्थी नहीं आए इसलिए चार साल पहले यूनिवर्सिटी ने भी यह कोर्स बंद कर दिया। यूनिवर्सिटी के नियमों के मुताबिक, लगातार दो साल किसी भी डिप्लोमा कोर्स में 10 से कम प्रवेश होने पर वह डिप्लोमा संबंधित कॉलेज में बंद कर दिया जाता है। योगा कोर्स के मामले में ऐसा ही हुआ। यूनिवर्सिटी के उपकुलसचिव वीएन सिंह बताते हैं कि छात्रों की संख्या पर्याप्त न होने से कॉलेज योगा का डिप्लोमा कोर्स संचालित नहीं करना चाहते।
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