नारी निकेतन से आश्रय गृह भेजी गई संवासिनियों की मौत के बाद व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। दस महीने में नारी निकेतन की करीब दस संवासिनी बीमारियों की वजह से दम तोड़ चुकी हैं। स्टाफ बेहद कम रह जाने से इनकी देखरेख भगवान भरोसे है।
सप्ताह भर में दो संवासिनी की मौत हुई है। पिछली साल सितंबर से अब तक आठ और संवासिनियों की जान जा चुकी है। मंगलवार को खून की कमी की वजह से संवासिनी की मौत हुई थी। सवाल है कि संवासिनियों के खानपान पर सरकार के मोटे बजट के बावजूद इनके शरीर में खून की कमी आखिर क्यों हो रही है। पहले की ज्यादातर मौतों की वजह फेफड़े और सांस की बीमारी थी। जिला प्रोबेशन अधिकारी स्टाफ न होने से उपजी देखरेख की समस्या को वजह मानती हैं। वे बताती हैं कि 2007-08 में एक साथ कई संवासिनियों की मौत के बाद सहायक अधीक्षक से लेकर निचले स्टाफ तक को सस्पेंड कर दिया गया था। तब से स्टाफ की कमी आज तक बनी है। यहां 68 संवासिनियों पर एक टीचर, एक क्राफ्ट प्रशिक्षक, दो नर्स और सात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। जबकि कुल 24 पद यहां स्वीकृत हैं। इनमें करीब सात चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के पद हैं जिनका काम इन पर निगरानी रखना और देखरेख का होता है। मनोवैज्ञानिक का पद खाली है तो सहायक अधीक्षक के पद का प्रभार राजकीय संप्रेक्षण गृह के क्रीड़ा संयोजक अनंग पाल संभाल रहे हैं। जिला अस्पताल और मानसिक चिकित्सालय के डॉक्टर वीकली विजिट करते रहते हैं।
दो सौ रुपये बढ़ा भत्ता
अभी तक प्रति संवासिनी 1200 रुपये प्रतिमाह भरण पोषण भत्ता मिलता था। सरकार ने इस सत्र से इसे 1400 रुपये कर दिया है। इसमें प्रति संवासिनी 201 ग्राम आटा, 80 ग्राम चावल, 40 ग्राम दाल, 110 ग्राम सब्जी से लेकर दूध और फल तक शामिल हैं। संवासिनी की सेहत और संस्थान की बचत के आधार पर इसे कुछ बढ़ा घटा भी दिया जाता है।
जीर्णोद्धार में महीना भर और
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि समाजसेवी शकील कुरैशी करीब डेढ़ करोड़ से ज्यादा रुपये लगाकर नारी निकेतन का जीर्णोद्धार करा रहे हैं। टायल्स आदि के बारीक काम में वक्त लग रहा है। उम्मीद है कि महीने भर में संवासिनियों के रहने लायक स्थिति हो जाएगी। तब वे आश्रय गृह से अपनी संवासिनियों को वापस बुला लेंगी। इस बारे में डीएम के सामने भी स्थिति स्पष्ट कर चुकी हैं।
छह जुलाई को हाईकोर्ट में सुनवाई
जिला प्रोबेशन अधिकारी बताती हैं कि किसी संस्था ने प्रदेश भर के नारी निकेतन में व्यवस्थाओं को लेकर जन याचिका डाल रखी है। हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई अब छह जुलाई को होनी है।